‘मैं अपने हर तराने में हमेशा गाऊंगा, तुझको वहां सीमा पे अपने साथ लेकर जाऊंगा’
अमर उजाला ब्यूरो
पानीपत। एसडी पीजी कॉलेज में हरियाणा स्वर्ण जयंती के अवसर पर हरियाणा साहित्य अकादमी पंचकूला द्वारा पंडित दीन दयाल उपाध्याय की पावन स्मृति में कवि सम्मेलन का भव्य आयोजन किया गया जिसका उद्घाटन पानीपत शहर विधायक रोहिता रेवड़ी ने किया। कवि सम्मलेन में देश के सुप्रसिद्ध कवियों ने अपनी कविताओं का पाठ कर सबको मंत्रमुग्ध कर दिया।
फरीदाबाद से दिनेश रघुवंशी, दिल्ली से दीपक सैनी, मेरठ से सत्यपाल सत्यम, रेवाड़ी से रमेश चंद्र शर्मा, रोहतक से वीरेंद्र मधुर, झज्जर से मास्टर महेंद्र, हिसार से डॉ. चंद्रशेखर जैसे कवियों ने सम्मलेन में शिरकत की। साहित्य अकादमी पंचकूला की निदेशक कुमुद बंसल और उपाध्यक्ष राधे श्याम का सानिध्य भी कवि सम्मेलन में रहा। एसडी पीजी कॉलेज प्रबंधकारिणी के प्रधान दिनेश गोयल और प्राचार्य डॉ. अनुपम अरोड़ा ने सबका स्वागत किया। मंच संचालन संतोष कुमारी ने किया।
दिनेश रघुवंशी ने कहा कि मैं अपने हर तराने में हमेशा गाऊंगा, तुझको वहां सीमा पे अपने साथ लेकर जाऊंगा, तुझको है तन में सांस जब तक भी तिरंगे कसम है तेरी, लिपटकर आऊंगा तुझमे या फिर लहराऊंगा तुझको।।
दीपक सैनी ने अपनी काव्य रचना में सुनाया कि उत्तर, दक्षिण, पूरब व पश्चिम तक भारत को मिला दिया, तुमने तो आके मुरझाये हुए कमल को खिला दिया, जो भी टकराने आया सबको भीतर तक हिला दिया, चाय पिलाने वाले ने इन सबको पानी पिला दिया।। मेरठ से आए सत्यपाल सत्यम ने कहा कि धरती से पानी निकलेगा, अर्जुन जैसा बाण चाहिए, मरघट के मुर्दे उठ जाएं, ऐसा स्वर में प्राण चाहिए, आजादी को कायम रखने की, खातिर बलिदान चाहिए अभी सुभाष जी मरे नहीं, जनता में इमान चाहिए।। रमेश चंद्र शर्मा ने सुनाया कि सिद्धियों की राह का साधक नहीं मैं है निरंतर साधना ही साध्य मेरा पूजता हूं भाव कुसुमांजलि उसे दे, राष्ट्र रुपी देवता आराध्य मेरा।। गीतकार वीरेंद्र मधुर ने कहा कि आप तो अर्ध से नापते गीत है, इसलिए आजकल कांपते गीत है, छंद की व्याकरण तो कथा हो गई, चुटकुलों के तले हांफते गीत हैं।। हास्य व्यंग्य में झज्जर से मास्टर महेंद्र ने कहा जब उनकी गली से मेरा जनाजा गुजरा, वो अपने घर में करते रहे मुजरा, चार अश्क भी जनाजे पे बहाने नहीं आए, आखरी सलाम का हाथ भी हिलाने नहीं आए।। हिसार से आए डॉ. चंद्र शेखर ने कहा जहां डाल-डाल पर उल्लू है, डेरों में शोर भतेरा, वो भारत देश है मेरा, सारे जहां का लुच्चा पाकिस्तान तुम्हारा, तुम जिल्लते हो इसकी, ये बद्निशा तुम्हारा।
-पंडित दीन दयाल उपाध्याय की पावन स्मृति में कवि सम्मेलन का आयोजन
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