निंबरी गांव में बने डंपयार्ड के कारण नहीं हो रहे युवाओं के रिश्ते, गांव में 350 लोगों को हुई सांस की बीमारी
पानीपत। गांव निंबरी में बना डंपयार्ड गांव वालों के लिए अभिशाप बनता जा रहा है। शहर के कूड़े का निस्तारण करने के लिए गांव में डंपयार्ड बनाया गया है जिसमें रोजाना 50 टन के करीब कूड़ा डाला जाता है। हर समय गांव में कूड़े की बदबू फैली रहती है। कूड़े के कारण ही गांव में मक्खियों व मच्छरों का कोहराम है। मक्खियों के कारण गांव के लोग दिन में भी मच्छरदानी लगाकर बैठते हैं। वहीं गांव के 350 से अधिक लोग सांस की बीमारियों की चपेट में आ चुके हैं। गांव की जनसंख्या 5 हजार के लगभग है जिसमें से हर दूसरे व्यक्ति को आंखों में जलन की बीमारी भी लग गई है। गांव में फैली बदबू व बीमारियों के कारण कोई बाप अपनी बेटी का गांव में रिश्ता करने को भी तैयार नहीं है। गांव वालों ने बताया कि कई बार तो रिश्ता फाइनल होते-होते टूट जाता है।
रात के समय लगा दी जाती है कचरे में आग, धुएं के कारण 350 लोगों को हुई सांस की बीमारी :
डंपयार्ड में रोजाना रात को आग लगा दी जाती है जो रात भर सुलगता रहता है। जिसका धुआं सुबह तक पूरे गांव में फैल जाता है। इस धुएं के कारण गांव के 350 लोगों को सांस की बीमारी हो चुकी है। धुएं के कारण गांव में हर व्यक्ति की आंखों में जलन रहने लगी है।
इन लोगों को हैं सांस की बीमारी की गंभीर समस्या
रणधीर, रामकिशन, रोहताश, प्रताप, धन्ना राम, सतपाल, भल्ला राम, सूरज भान, राजरानी, भीरबा, शोरण सिंह
गांव में नहीं हो रहे युवाओं के रिश्ते : हवा सिंह
ग्रामीण हवा सिंह ने बताया कि गांव में हर समय बदबू फैली रहती है, जिस कारण गांव के युवाओं के रिश्ते भी होने में भी दिक्कतें आती है। गांव में कोई भी बाप अपनी बेटी देने को तैयार नहीं है। हवा सिंह ने कहा कि उन्हें इस बात का मलाल नहीं है कि गांव के युवाओं का रिश्ता नहीं होता, गंदगी में कोई भी अपनी बेटी नहीं देगा, वो भी नहीं, लेकिन प्रशासन की लापरवाही पर उन्हें गुस्सा आता है। शहर की गंदगी को मिटाने के लिए गांव के लोगों के सर पर कूड़ा डालना शुरू कर दिया है। प्रशासन को इसका स्थायी समाधान निकालना चाहिए।
धुएं के कारण सुबह की, बदबू के कारण शाम की सैर हुई बंद :
ग्रामीणों ने कहा कि सुबह पूरे गांव में व खेतों में धुआं फैल जाता है, जिस कारण गांव वालों की सुबह की सैर भी बंद हो गई है। पांच साल से गांव में डंपयार्ड बना हुआ है, शुरुआत में ज्यादा दिक्कतें नहीं आती थी, लेकिन तीन साल से ज्यादा दिक्कतें आ रही है। शाम के समय बदबू के कारण लोग सैर करने नहीं जाते। जिस कारण गांव में कोई युवा खेलों की प्रेक्टिस भी नहीं करता है।
गांव वाले दे चुके हैं चार बार धरना, प्रशासनिक अधिकारियों ने दिया था समाधान का आश्वासन :
गांव के लोग पिछले तीन साल में चार बार 5-6 दिनों तक धरना दे चुके हैं। लोगों का कहना है कि हर बार उनको आश्वासन देकर ही उठा दिया गया, लेकिन हर बार समस्या ज्यों की त्यों बनी रहती है।
धुंए के अलावा कूड़े में बनती है जहरीली गैस, आवारा पशु भी तोड़ देते हैं दम :
ग्रामीणों का कहना है कि कूड़े में गैस बनती है, जिस कारण आवारा पशु उसका शिकार होते हैं। आवारा पशु खाने की तलाश में भटकते हुए डंपयार्ड में चले जाते हैं, वहां जहरीली गैस के कारण आवारा पशु दम तोड़ देते हैं।
निंबरी के साथ साथ छाजपुर गांव को भी हो रही डंपयार्ड से दिक्कतें :
डंपयार्ड केवल निंबरी के लिए ही समस्या नहीं है। गांव छाजपुर के लोग भी इस समस्या से परेशान है। हवा का रूख बदलते ही धुआं छाजपुर गांव की तरफ चला जाता है। छाजपुर के लोगों को भी अब सांस की बीमारी का डर सताने लगा है।
हर साल हो रही सांस की बीमारी के कारण 6-7 मौत :
गांव वालों का कहना है कि इस डंपयार्ड से निकलने वाले धुएं के कारण हर साल 6-7 लोगों की मौत होती है। लोगों के लिए यह सबसे गंभीर समस्या बन चुकी है। इसका समाधान बहुत जल्दी होना आवश्यक है।
पानी का टीडीएस 2 हजार के पार :
ग्रामीणों ने बताया कि गांव में जो डंपयार्ड बनाया गया है वो 70 फीट गहरी रेत की खदान में बनाया गया है। जिसमें गिला कचरा डाला जाता है। कचरे से पानी का रिसाव होकर जमीन में चला जाता है।
एक्सपर्ट डॉ. गौरव श्रीवास्तव की क्या है राय?
सवाल : निंबरी गांव में डंपयार्ड बनाया गया है, जिसमें रात के समय कूड़े में आग लगा दी जाती है, गांव वालों का कहना है कि इस कारण गांव के 350 लोगों को सांस की बीमारी हो चुकी है, क्या ऐसा संभव है ?
जवाब : ऐसा बिल्कुल संभव है, क्योंकि कूड़े में आग लगाने से कार्बन मोनो ऑक्साइड जैसी अनेकों जहरीली गैस निकलती है। जो फेफड़ों पर सीधा असर डालती है। यह पूरे गांव के लिए घातक हो सकता है। इसकी चपेट में गांव के सभी लोग भी आ सकते हैं।
सवाल : गांव वालों का कहना है कि हर साल 6-7 लोगों की मौत सांस की बीमारी के कारण ही हो रही है। क्या यह इतना हानिकारक है कि किसी की मौत हो सके ?
जवाब : संभव है, कूड़ा जलने के कारण जो जहरीली गैस हवा में घुलती है वो सांस के साथ हमारे फेफड़ों तक जाती है। जो फेफड़ों की नलियों को ब्लॉक कर देती है व फेफड़े की नलियां सिकुड़नी भी शुरू हो जाती है। इससे किसी की भी मौत हो सकती है। गांव में दमे व टीबी जैसी घातक बीमारियां भी फैल सकती है।
सवाल : गांव वालों का कहना है कि 70 फीट गहरी खाई में गीला कूड़ा डाला जाता है, जिस कारण गांव के पानी का टीडीएस दो हजार तक पहुंच गया है।
जवाब : 70 फीट पर रेत आना शुरू हो जाता है। जिस कारण गंदे पानी का रिसाव भूजल को प्रभावित कर सकता है। कचरे का पानी भी टीडीएस बढ़ने का कारण हो सकता है।
सवाल : इसका समस्या का समाधान क्या है ?
जवाब : निंबरी में कूड़े के लिए ट्रिटमेंट प्लांट नहीं लगाया गया है। जोकि एक बहुत बड़ी लापरवाही है। ट्रिटमेंट प्लांट लगाकर ही इस समस्या का समाधान निकाला जा सकता है। हर डंपयार्ड में ट्रिटमेंट प्लांट बनाना आवश्यक है।
निगम आयुक्त ने ना फोन उठाया, ना ही किया मेसेज का रिप्लाई : दिखा रहा कि प्रशासन कितना सजग व गंभीर
नगर निगम आयुक्त प्रियंका सोनी को दो बार फोन किया, लेकिन उन्होंने फोन उठाना ठीक नहीं समझा। निगमायुक्त को व्हाट्सएप के साथ साथ प्रसनल मेसेज भी किया, लेकिन दो घंटे इंतजार करने के बाद तक भी उनका कोई रिप्लाई नहीं आया। यह दिखाता है कि प्रशासन शहर की समस्याओं को लेकर कितना गंभीर है?
सोनीपत में हैं ट्रीटमेंट प्लांट, वहां कूड़ा क्यों नहीं जा रहा इस बारे में नगर निगम से लिया जाएगा जवाब : महिपाल ढ़ांडा
इस बारे में ग्रामीण विधायक महिपाल ढ़ांडा ने बताया कि निंबरी में कुछ समय तक कूड़ा डालने के लिए डंपयार्ड बनाया गया है। यहां पर क्यों कूड़ा जलाया जा रहा है और क्यों सोनीपत नहीं भेजा जाता इस बारे में नगर निगम से जवाब मांगा जाएगा। समस्या का समाधान किया जाएगा।