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यहां मोदी की भी नहीं चलती, यहां सिस्टम हमारा है कहने वाली सीआईए-टू के खिलाफ हुआ हत्या का केस दर्ज

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यहां मोदी की नहीं चलती, यहां सिस्टम हमारा है कहने वाली सीआईए-टू के खिलाफ हुआ हत्या का केस दर्ज
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पानीपत। हमारे यहां मोदी की नहीं चलती है, यहां सारा सिस्टम हमारा है, ये कहकर पीट पीट टेलर की हत्या करने के आरोपी सीआईए टू के इंचार्ज समेत 8 कर्मचारियों पर हत्या व अन्य धाराओं में केस दर्ज हो गया। परिजनों की मांग पर इंचार्ज योगेश कटारिया, एएसआई रविंद्र कुंडू, एएसआई प्रवीण, एएसआई धर्मबीर व अन्य चार पर डीएसपी सतीश वत्स ने मुकदमा दर्ज कर इनकी गिरफ्तारी के प्रयास तेज कर दिए हैं। चार दिनों तक लगातार धरने, जिले सहित अन्य जिलों की पंचायतों, खाप सहित सैकड़ों लोगों के आगे पुलिस प्रशासन को झुकना ही पड़ा। एसपी के निर्देश अनुसार डीएसपी ने खुद देर रात तक चांदनीबाग थाना में बैठकर आरोपियों के खिलाफ हत्या का केस दर्ज करवाया। गौरतलब है कि हत्या के 4 दिन बीत जाने के बाद भी पुलिस की मनमानी के कारण मृतक का पोस्टमार्टम नहीं हुआ है। सोमवार को इस केस के दर्ज हो जाने के बाद परिजन मंगलवार को रोहतक पीजीआई जाएंगे व मृतक का पोस्टमार्टम करवाएंगे। साथ ही दूसरे जिले की पुलिस को मामले की जांच सौंप दी जाएगी।
पंचायत की इन पांच बातों ने जिला व पुलिस प्रशासन को किया सोचने पर मजबूर:
पंचायत में जिले व राज्य के अनेकों गांव से आए सरपंच, पंच, खाप सहित स्थानीय लोगों ने सोमवार सुबह से ही मृतक के घर के बाहर धरना दिया। जिसमें सभी लोगों ने पुलिस प्रशासन व जिला प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी कर रोष प्रकट किया। साथ ही दोपहर 1 बजे एसपी सुमित कुमार को फोन कर 3 घंटों के भीतर मामले में संज्ञान लेने की बात कही। लोगों ने एसपी को दोपहर 4 बजे नेशनल हाईवे जाम करने की चेतावनी भी दी। जिसके बाद करीब 2 बजे एसपी के आदेशानुसार पुलिस प्रशासन से डीएसपी मुख्यालय सतीश वत्स मौके पर पहुंचे व इसके ठीक 47 मिनट बाद जिला प्रशासन की ओर से एसडीएम विवेक चौधरी मौके पर पहुंचे। वहां पहुंच कर दोनों ने लोगों की बात को सुना व 5 बातें ऐसी जिनपर जिला व पुलिस प्रशासन को सोचने व फैसला लेने पर मजबूर कर दिया।
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- वारदात के 4 दिन बाद भी आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज नहीं हुआ, आखिर क्यों पुलिस प्रशासन अपने महकमे के हत्यारोपियों को बचाने का काम कर रही है ?
- पुलिस किसी की भी शिकायत पर आमजन के खिलाफ तुरंत मुकदमा दर्ज करती है, तो फिर अभी तक सैंकड़ों लोगों की एक ही शिकायत पर पुलिस के खिलाफ केस दर्ज क्यों नहीं किया गया। जबकि पुलिस भी इस बात को मान चुकी है कि ये मौत पुलिस कस्टडी में हुई है।
- अगर कानून सभी के लिए बराबर है, तो फिर क्यों अभी तक कानून को तोड़ने वाले कानून के कर्मचारियों के खिलाफ केस दर्ज नहीं हुआ।
- हम वो लोग है, जो दिन-रात मेहनत करते है और अनेकों तरह का टेक्स देते है, जिससे सभी सरकारी अधिकारियों व कर्मचारियों का वेतन दिया जाता है। अगर ऐसे हमारी ही हत्या की जाएगी, तो इन जनता के रखवालों पर कौन भरोसा करेगा ?
- परिवार का मुखिया ही कमा कर परिवार को गुजारा चलाता है, पुलिस ने उसी मुखिया को मार दिया, तो मृतक के दोनों बच्चों, पत्नी सहित परिजनों का गुजर बसर करने के लिए जिला प्रशासन को एक सरकारी नौकरी परिवार के सदस्य को देनी चाहिए।
इन चार मांगों को रखा सामने:
धरने पर बैठे रोषित लोगों ने एसडीएम व डीएसपी के सामने 4 प्रमुख मांगों को रखा। जिसमें आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज करने, उनको गिरफ्तार कर उनके खिलाफ कार्रवाई करने, मृतक के परिजनों को 1 करोड़ का मुआवजा देने व परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी दिए जाने की मांग की। जिसमें डीएसपी ने परिजनों से लिखित तौर पर शिकायत ली व मामले में सोमवार को ही केस दर्ज करने की बात कही। एसडीएम ने जिला प्रशासन के पास इतना फंड न होने के कारण घोषणा न करने की बात कही व डीसी रेट पर मृतक की पत्नी को चपरासी की नौकरी देने की बात कही। साथ ही कहा कि वें परिवार की मांगों को लिखित तौर पर सरकार तक पहुंचा देंगे व परिवहन मंत्री के कोष से मुआवजा दिलवाने का प्रयास करेंगे। रेड क्रॉस से भी परिजनों की सहायता करवाने की बात कही।
जींद के गांव डामलमवाला के सरपंच परिजनों के बीच पहुंचे। जहां पहुंच कर उन्होंने भी पानीपत पुलिस के प्रति रोष जाहिर किया। उन्होंने कहा कि परिजनों की जो जिला प्रशासन व पुलिस से मांग है, वो हकीकत में मांग नहीं है, वो हर आदमी का हक है। ये हक अगर पुलिस व प्रशासन दे देगा तो ठीक है, वरना तो हक छीन कर भी लिया जाएगा। पुलिस ने हत्या की है और पुलिस ने माना भी है, तो फिर पुलिस कार्रवाई क्यों नहीं कर रही है। वहीं रोते-बिलखते बुजुर्ग पिता ने कहा कि वारदात को 4 दिन हो गए। लेकिन कोई भी अधिकारी या सरकार की ओर मंत्री उन तक नहीं आया। पुलिस भी सिर्फ इसलिए आ रही है, क्योंकि इन्होंने तो हत्या की है। ये तो अपने ही बचाव में आ रहे है। वहीं मृतक की पत्नी व बच्चों ने रोते हुए न्याय की मांग की।
सीआईए में बोले थे पुलिसकर्मी: यहां मोदी की भी नहीं चलती, यहां सिस्टम हमारा है:
सीआईए-टू पुलिसकर्मी राजेश को उसके घर से जबरदस्ती उठा कर ले गई थी। साथ ही एक घंटे के भीतर वापस छोड़ जाने की बात कही थी। करीब दो घंटे तक भी उनके वापस न आने पर परिजन राजेश का पता करने पर अनाज मंडी स्थित सीआईए- टू गए। जहां पहुंच कर परिजनों ने राजेश के बारे में पूछा। साथ ही कहा कि उसने कपड़े भी नहीं पहने हुए व वो भूखा भी है। जिसके जबाब में पुलिसकर्मी बोले कि उसकी सेवा हम कर देंगे। अब वो हमारे हवाले है। परिजनों ने उससे मुलाकात करने की बात कहीं तो पुलिसकर्मियों ने गाली-गलोच करते हुए कहा कि यहां मोदी की भी नहीं चलती है। यहां सारा सिस्टम हमारा है। हम जिससे मिलवाना चाहेंगे, उसे मिलवाएंगे। बाकी कोई किसी की भी अप्रोच ले कर यहां आए, हम चलेंगे अपने हिसाब से ही।
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डीएसपी अंकल हमें हमारे पापा चाहिए, वो लाके देदो:
सोमवार को पंचायत में डीएसपी सतीश वत्स व एसडीएम विवेक चौधरी लोगों को मनाने के लिए पहुंचे। उनके सामने परिवार के लोग फूट-फूट कर रोने लगे। मृतक का 11 वर्षीय बेटा मोनी उर्फ नवीन व 5 साल का बेटा मीतू ने रोते हुए कहा कि डीएसपी अंकल हमें हमारे पापा चाहिए, वो ला के देदो। हमें नहीं पता की 302 क्या है, पर हमें ये पता है कि हमारे पापा को आपने मारा है। हमें हमारे पापा देदो। साथ ही मृतक की पत्नी गीता ने रोते-बिलखते हुए कहा कि पुलिस उसके पति के हाथ-पैर तोड़ कर ही उन्हें सौंप देती। वो मजदूरी कर अपने पति व बच्चों को पाल लेती। कानून हाथ में लेेकर जान से मारने का हक क्या सिर्फ शहर के सबसे बड़े गुंडे पुलिस को ही है। जिसके बाद डीएसपी ने परिजनों की मांग पर सोमवार को ही आरोपी पुलिसकर्मियों के खिलाफ हत्या की धारा 302 सहित अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज करवाया।
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