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ग्राम सभाओं के आयोजन में हो रही खानापूर्ति

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ग्राम सभाओं के आयोजन में हो रही खानापूर्ति
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अमर उजाला ब्यूरो
इसराना। ग्राम सभाओं के लिए खंड कार्यालय के सरकुलर को सरकारी अधिकारी, कर्मचारी और ग्राम पंचायत गंभीरता से नहीं ले रहीं। इस वजह से ग्राम सभाओं के नाम पर खानापूर्ति ही हो रही है। इन सभाओं में शिक्षा विभाग से संबंधित गांव के विद्यालय के हेड मास्टर या टीचर, पंचायती राज विभाग से जेई लेवल के अधिकारी नहीं पहुंच रहे। जिन गांवों में चौधर महिला के हाथ में है, वहां पर असल चौधरी की बजाय उनके बेटे, पति या ससुर कार्रवाई का संचालन कर रहे हैं। सरकार और प्रशासन भले ही पंचायती राज संस्थाओं में महिलाओं को उनके अधिकार दिलाने के दावे कर रही है। लेकिन हकीकत में कुछ गांवों में चौधर घर की चारदिवारी तक ही सीमित है।
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शिक्षित पंचायतें बनीं तो लगा कि समय बदलेगा। चुनाव जीतने पर विशेषकर शिक्षित महिलाओं का हर तरफ अभिनंदन हुआ। कहा जा रहा था कि अब महिलाएं स्वयं चौधर करेंगी। शिक्षित निर्वाचित महिलाओं ने भी कहा था कि वे अपना कार्य स्वयं करेंगी। अभिनंदन होने के बाद वे घरों में ही सिमट कर रह गईं। उनके सिर्फ साइन करवा लिए जाते हैं। उनके स्थान पर बैठकों और पंचायतों के काम उनके परिजन देख रहे हैं। शनिवार को इसराना ब्लॉक के एक गांव में हुई ग्राम सभा का नजारा ठीक इसी तरह का रहा। रियल्टी चेक करने पहुंचे मीडिया कर्मियों के सामने भी ग्राम सभा की कार्यवाही में गांव के सरपंच के परिजन लगे रहे। ग्राम सभा से महिला सरपंच नदारद रही।
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