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गोदामों में भरा बायरों का माल, टेक्सटाइल उद्योग पड़ा ठप, हर रोज टैक्सटाइल को 15 करोड़ व सभी प्रकार के उद्योग को एक दिन में हो रह

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फोटो 32 से 35
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हड़ताल से टेक्सटाइल उद्योग पड़ा ठप, हर रोज 15 करोड़ का नुकसान
बायरों का माल ऑर्डरों पर तैयार किया जा चुका है, करोड़ों का माल गोदामों में तैयार पड़ा है
अमर उजाला ब्यूरो
पानीपत। ट्रांसपोर्टरों की हड़ताल से एक्सपोर्टरों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। बायरों का माल ऑर्डरों पर तैयार किया जा चुका है। करोड़ों का माल गोदामों में तैयार पड़ा है। टेक्सटाइल निर्यातक को प्रतिदिन 15 करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है, जबकि सभी प्रकार के उद्योग को एक दिन में 35 करोड़ का नुकसान हो रहा है। यहां से रोजाना 100 कंटेनर माल निर्यात के लिए महाराष्ट्र व गुजरात के बंदरगाहों के लिए माल लेकर निकलते थे। पांच छह कंटेनर माल बंदरगाहों से पानीपत लाया जाता था। इधर, एक्सपोर्टरों को चिंता सता रही है कि यदि हड़ताल लंबी चल गई तो उन्हें विदेशी बॉयरों से तय माल की डिलीवरी हवाई मार्ग से करनी पड़ सकती है। वहीं समुद्र के मुकाबले हवाई मार्ग का किराया बहुत महंगा है। एक्सपोर्टरों ने कहा कि सरकार को जल्द कोई रास्ता निकालना चाहिए।
पानीपत से विश्व के अधिकतर देशों में टेक्सटाइल उत्पादों का निर्यात किया जाता है। वहीं एक्सपोर्टर पानीपत में अपने कारखानों में विदेशी बॉयरों की मांग के अनुसार टेक्सटाइल उत्पादों का निर्माण करते हैं और फिर उन्हें विदेशों में निर्यात करते हैं। एक्सपोर्टर पानीपत में बनने वाले टेक्सटाइल उत्पाद को विदेशी बॉयर के एजेंट के सामने पैक करवाता है। वहीं पैक किए गए मॉल का लदान कंटेनर में कर ट्रक पर लाद कर मुंबई या फिर गुजरात के बंदरगाह पर भेजा जाता है। बंदरगाह से कंटेनर को विदेश जाने वाले समुद्री जहाज पर लादा जाता है। जबकि विदेशों से आने वाला कच्चा माल बंदरगाह से लादकर का पानीपत लाया जाता है। जबकि राजस्थान, गुजरात व उत्तर प्रदेश से टेक्सटाइल का कच्चा माल पानीपत लाया जाता है। इधर ट्रांसपोर्टरों की हड़ताल से पानीपत से अन्य राज्यों का टेक्सटाइल का तैयार व कच्चा माल का आवागमन पूरी तरह से ठप है। जबकि पानीपत से रोजाना 100 कंटेनर माल निर्यात के लिए महाराष्ट्र व गुजरात के बंदरगाहों के लिए माल लेकर निकलते थे। पांच छह कंटेनर बंदरगाहों से पानीपत लाया जाता था। इधर, एक्सपोर्टरों को चिंता सता रही है कि यदि हड़ताल लंबी चल गई तो उन्हें विदेशी बॉयरों से तय माल की डिलीवरी हवाई मार्ग से करनी पड़ सकती है। वहीं समुद्र के मुकाबले हवाई मार्ग का किराया बहुत महंगा है।
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डॉलर के रेट बढ़ने से मुश्किलें अधिक बढ़ीं
ट्रांसपोर्टरों की हड़ताल के व्यूह में फंसे एक्सपोर्टरों को उस समय कड़ा झटका लगा जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में डॉलर का रेट 69 रुपये प्रति डॉलर पार कर गया। डॉलर के रेट बढ़ने से एक्सपोर्टरों की नींद भी उड़ गई। गौरतलब है कि पानीपत के एक्सपोर्टर अमेरिकन डॉलर में ही एक्सपोर्ट किए गए माल का रेट तय करते हैं और भुगतान लेते हैं। एकाएक डॉलर के रेट चढ़ने से एक्सपोर्ट परेशान हैं और उन्हें डॉलर के रेट सामान्य होने का इंतजार है। डॉलर का रेट सामान्य होने पर ही एक्सपोर्टर विदेशी बॉयरों से टेक्सटाइल के आर्डर लेंगे। वर्तमान हालात ऐसे नहीं है कि रुपये के मुकाबले डॉलर के चढ़ते रेट के हिसाब से वे, विदेशी बॉयरों से टेक्सटाइल उत्पादों का नया आर्डर बुक कर सके। वहीं विदेशों से हर रोज पानीपत के एक्सपोर्टरों को सीधे तौर पर या फिर एजेंटों के माध्यम से टेक्सटाइल उत्पादों के आर्डर मिलते हैं। पानीपत एक्सपोर्टर एसोसिएशन के अध्यक्ष प्रेम सागर विज ने बताया कि ट्रांसपोर्टरों की हड़ताल व इंटरनेशनल मार्केट में रुपये के मुकाबले डॉलर का रेट चढ़ने से पानीपत के एक्सपोर्टरों की परेशानियां लगातार बढ़ रही हैं।

विदेश भेजने के लिए गोदामों में माल तैयार
गोदामों में टेक्सटाइल का माल भरा पड़ा है। विदेशों में माल भेजना है। आर्डर का माल तैयार हो चुका है गोदाम भर चुके हैं। अब माल कैसे भेजे ये समझ नहीं आ रहा है। हर रोज करोड़ों का नुकसान हो रहा है। इस जगत से पानीपत में लाखों लोगों का रोजगार जुड़ा है। ऐसे में एक्सपोर्ट हाउस बंद हो जाएंगे। इस जगत के बारे में सरकार व ट्रांसपोर्टरों को सोचना चाहिए। जल्द कोई रास्ता निकालना चाहिए। बायर उनसे नाराज हो रहे हैं।
- रमेश वर्मा, एक्सपोर्टर

एक्सपोर्टरों को प्रतिदिन 15 करोड़ का नुकसान
पानीपत से हर साल सात हजार करोड़ का माल विदेशों व देश के विभिन्न हिस्सों में निर्यात होता है। बायरों का माल ऑर्डरों पर तैयार किया जा चुका है। करोड़ों का माल गोदामों में तैयार पड़ा है। टेक्सटाइल निर्यातक को प्रतिदिन 15 करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है। सरकार को जल्द कोई रास्ता निकालना चाहिए।
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-विनोद खंडेलवाल, प्रधान चैंबर ऑफ कॉमर्स

जब तक मांगें नहीं मानी जाएंगी, हड़ताल खत्म नहीं होगी
ट्रांसपोर्टर काफी समय से अपनी मांगें रख रहे थे। उनकी एक न सुनी गई। जब सरकार ने उनकी कोई मांग नहीं मानी तो उनको मजबूरन हड़ताल पर जाना पड़ा। जब तक सरकार उनकी मांगें नहीं मानेगी वो हड़ताल को खत्म नहीं करेंगे। सरकार को उनकी मांगें माननी पड़ेगी।
-धर्मबीर मलिक, प्रधान पानीपत ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन
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