संदीप भौरिया
पानीपत।
खंदरा गांव के लाल नीरज चोपड़ा ने कॉमनवेल्थ में जैवलिन थ्रो में गोल्ड मेडल जीतकर इतिहास रच दिया है। गोल्ड मेडल जीतने के बाद गांव में जश्न का माहौल है। ग्रामीण एक दूसरे को लड्डू खिलाकर खुशी मना रहे हैं। नीरज की इस उपलब्धि पर पिता सतीश कुमार व मां सरोज देवी की आंखों से आंसू छलक आए।
नीरज चोपड़ा का जन्म 24 दिसंबर 1997 को गांव खंदरा में सतीश कुमार व सरोज देवी के घर हुआ। नीरज के परिजन साधारण किसान हैं। नीरज के पिता जहां खेती करते हैं, वहीं उनकी माता ग्रहणी है। नीरज के परिवार की खास बात यह है कि उनके पिता चार भाई है और उनका संयुक्त परिवार है। घर में परिवार के सभी 17 सदस्यों के लिए एक ही चूल्हे पर भोजन बनता है। नीरज के पिता व तीनों चाचा मात्र डेढ़ एकड भूमि में ही खेती कर अपने संयुक्त परिवार को पाल रहे हैं। नीरज की कक्षा नौ तक की शिक्षा खंदरा के पास स्थित गांव भालसी में भारतीय विद्या निकेतन स्कूल में हुई। इसके बाद नीरज ने कक्षा से लेकर 12 तक की पढ़ाई ओपन से की। वर्तमान में नीरज भारतीय थल सेना में सूबेदार पद नियुक्त है और कुरूक्षेत्र विश्वविद्यालय में बीए-द्वितीय वर्ष का विद्यार्थी है। नीरज को मिली अभूतपूर्व सफलता से उसका परिवार ही नहीं बल्कि पानीपत जिला में खुशी का माहौल है।
नीरज के स्कूल के प्रधानाचार्य रणवीर सिंह ने बताया कि नीरज पढ़ाई में सामान्य विद्यार्थी था और वह खेल में रुचि रखता था। कक्षा छह में उसका ध्यान पूरी तरह खेलों में समा गया और वह बॉडी बिल्डिंग में रुचि लेने लगा। कम आयु में ही नीरज ने जिम में कसरत करनी शुरू कर दी थी। वहीं चाचा भीम सिंह ने अपने भतीजे की खेल प्रतिभा को पहचाना और उसे खेलों में बढ़ावा देने लगे। चाचा भीम सिंह ने एक तरह से अपना जीवन नीरज को ही अर्पित कर दिया था। वे हर रोज नीरज को गांव खंदरा से पानीपत के शिवाजी स्टेडियम लेकर आते और जिम में नीरज को कसरत करवा कर वापस गांव ले जाते। इस दौरान नीरज की मित्रता जैवलीन थ्रो खिलाड़ी जयवीर से हुई। जयवीर से दोस्ती बढ़ने के साथ नीरज की जैवलीन थ्रो खेल में रुचि बढ़ने लगी। नीरज ने जैवलीन थ्रो का अभ्यास शुरू किया। उसने जिला स्तर पर जैवलीन थ्रो में प्रथम स्थान हासिल क्या किया फिर उसने पीछे मुड़ कर नहीं देखा। जब नीरज अपने प्रदर्शन को लेकर निराश होते थे चाचा भीम सिंह उनमें उत्साह भरकर बेहतर प्रदर्शन के लिए प्रेरित किया। कड़ी मेहनत व विश्व स्तरीय प्रशिक्षण के बल पर आज नीरज ने कॉमनवेल्थ गेम्स में अपने देश भारत के लिए स्वर्ण पदक जीत कर इतिहास रच दिया। नीरज के चाचा सुल्तान सिंह व सुरेश ने बताया कि उन्हें व उनके परिजनों को पूरा विश्वास है कि नीरज कॉमनवेल्थ गेम्स के इतिहास को एशियन गेम्स व 2020 में जापान में आयोजित होने वाले ओलंपिक खेलों में भी गोल्ड मेडल जीतने के साथ दोहराएगा।
उधार पैसे लेकर दिलाया भाला
चाचा भीम सिंह बताते हैं कि जब नीरज पानीपत के शिवाजी स्टेडियम में जवैलिन की तैयारी करता था। वह रोज नीरज को अपने साथ बाइक पर लेकर जाते थे। एक दिन उसने देखा कि नीरज एकांत में बैठकर रो रहा था। उसने पूछा तो काफी देर तक नीरज ने कुछ नहीं बताया। काफी बार पूछने पर उसने बताया कि उसके भाले की आगे की नोंक टूट गई है। उसने पूछा कि नया भाला कितने का आता है। तब नीरज ने कहा कि चाचा जी रहने दो बहुत महंगा आएगा। उसने कई जगह भाले का रेट पता किया। उस वक्त उधार पैसे लेकर नीरज के लिए 25 हजार का भाला लेकर आया था। नीरज नए भाले को देखकर काफी खुश था। उसने जैवलिन को चूम लिया। भाला उसकी जिंदगी बन गया। उसी ने उसकी जिंदगी बदल दी है।
जब भाला टूटने के बाद रो पड़ा था नीरज, चाचा को दिया उसकी मेहनत का फल
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