गुरुद्वारा के मलबे से आने लगी दुर्गंध
-आसपास के लोगों का घरों में रहना हुआ मुश्किल
-प्रशासन व प्रबंधन कमेटी चुप, अनदेखी से रोष
अमर उजाला ब्यूरो
पानीपत।
पहली पातशाही गुरुद्वारा भवन के मलबे से दुर्गंध आने लगी है। इस कारण आसपास के दुकानदारों का काम करना और लोगों का घरों में रहना मुश्किल हो गया है। हालांकि, कोई भी खुलकर विरोध नहीं कर रहा है, लेकिन दुर्गंध के संबंध में तरह-तरह की चर्चाएं चल रही हैं। लोग दबी जुबान में मलबे में किसी के दबे होने की आशंका जता रहे हैं। लोगों का आरोप है कि दुर्गंध को दिन के वक्त स्प्रे आदि से दबा दिया जाता है, लेकिन रात व अल सुबह सांस लेने में दिक्कत हो रही है। वहीं, प्रशासन की पांच सदस्यीय टीम एक सप्ताह बाद भी किसी तरह के निर्णय पर नहीं पहुंच पाई है। जबकि गुरुद्वारा प्रबंधन ने किसी तरह की बदबू नहीं आने का दावा किया है।
गुरुद्वारा पहली पातशाही के दो मंजिला भवन और तीन मंजिला गुंबद गिराने से हुए हादसे को सोमवार को एक सप्ताह हो गया। एनडीआरएफ व समुदाय के लोगों ने हादसे के बाद लगातार तीन दिन तक रेसक्यू ऑपरेशन चलाया था। इसके बाद पांच लोगों के शव निकाले गए थे। एनडीआरएफ ने उस वक्त मलबे में किसी अन्य व्यक्ति के नहीं दबे होने की बात कही थी। इसके बाद जिला प्रशासन ने बचाव कार्य बंद कर दिया था और गुरुद्वारा भवन को जांच के लिए कब्जे में ले लिया था। आसपास के दुकानदारों व निवासियों की बातों पर यकीन करें तो गुरुद्वारा भवन से अब दुर्गंध आ रही है। बदबू दिन के वक्त कम होती है, लेकिन रात और अल सुबह ज्यादा होती है।
जांच कमेटी किसी नतीजे तक नहीं पहुंची
मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने हादसे के अगले दिन मंगलवार को गुरुद्वारा का दौरा कर बचाव कार्यों की जानकारी ली थी। जिला प्रशासन को पांच सदस्यीय कमेटी गठित कर मामले की जांच कराने के आदेश दिए थे। डीसी के आदेश पर एडीसी की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय टीम का गठन किया था। पुलिस अधिकारी गुरुद्वारा से सीसीटीवी की डीवीआर तो ले गए, लेकिन प्रशासन की पांच सदस्यीय टीम मामले की जांच में कुछ स्पष्ट नहीं कर पाई।
एक क्रेन को वापस भेजा, एक के सहारे चलाया काम
गुरुद्वारा पहली पातशाही के भवन व गुंबद गिराने का काम सोमवार को चौथे दिन भी लगातार जारी रहा। सोमवार को अंबाला से मंगवाई गई एक क्रेन को वापस भेज दिया गया। बताया जा रहा है कि इस क्रेन का करीब 60 हजार रुपये एक दिन का किराया था। इसके ऊपर कारीगरों व लेबर का खर्च अलग से रह गया। इस हिसाब से करीब 90 हजार रुपये एक दिन का चार्ज लगता था। तकनीशियन व कारीगर सोमवार को एक क्रेन की मदद से गुंबद तोड़ने व मलबा हटाने का काम किया। गुंबद की छतरी तोड़ने के बाद अब इसकी पहली मंजिल को तोड़ने का काम शुरू किया गया है। वहीं बाजार की तरफ दीवार का भी कुछ हिस्सा तोड़ा गया। जिसके चलते सोमवार को लगातार एक सप्ताह तक गुरुद्वारा मार्केट की दुकानें पूरी तरह से बंद रही।
पाठी देवेंद्र सिंह के आश्रित परिवार को दी आर्थिक मदद
यमुनानगर के गांव कौत्तरखाना निवासी पाठी देवेंद्र सिंह की गुरुद्वारे कप मलबे के नीचे दबने से मौत हो गई थी। उसका शव तीसरे दिन सर्च अभियान के दौरान बरामद किया था। बताया जा रहा है कि यमुनानगर के कौत्तरखाना गांव में सोमवार को भोग डाला गया। शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी अमृतसर व गुरुद्वारा पहली पातशाही पानीपत द्वारा आश्रित परिवार को एक-एक लाख रुपये की राहत राशि दी। वहीं हरियाणा सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी द्वारा आश्रित परिवार को हर माह पेंशन देने का भरोसा दिया और सोमवार को मौके पर ही आश्रित परिवार को पांच हजार रुपये की पेंशन का पहला चेक दिया।
यह है मामला
जीटी रोड स्थित गुरुद्वारा पहली पातशाही का तीन मंजिला गुंबद व दो मंजिला भवन सोमवार 12 जून को गिर गया था। जिसमें पांच श्रमिकों व सेवादारों की मौत हो गई और करीब नौ लोग घायल हो गए। प्रशासन को मलबे में दबे शवों को निकालने को लेकर एनडीआरएफ का सहारा लेना पड़ा। एनडीआरएफ की मदद से करीब 36 घंटे तक लगातार रेसक्यू ऑपरेशन चला।
गुरुद्वारा पहली पातशाही के कंडम भवन को गिराने का काम तेजी के साथ चल रहा है। अंबाला से मंगवाई एक क्रेन काफी महंगी पड़ रही थी। जिसके चलते उसको वापस भेज दिया गया है। फिलहाल एक ही क्रेन से मलबा उतारने व हटाने का काम चल रहा है। गुरुद्वारा में किसी तरह की दुर्गंध नहीं आ रही है। प्रशासन द्वारा सर्च अभियान में भी किसी व्यक्ति के अंदर न होना पाया गया था। फिर भी मलबा हटने के साथ सबकुछ सामने आ जाएगा।
सुखदेव सिंह, प्रधान, गुरुद्वारा पहली पातशाही, पानीपत।