नगर निगम चुनाव में कालेधन का इस्तेमाल करने वालों पर आयकर विभाग की नजर
पानीपत। नगर निगम के चुनाव में कालेधन के होने वाले इस्तेमाल के आगे सारे बौने नजर आ रहे हैं। ऐसे में उम्मीदवार पर शिकंजा कसने के लिए आयकर विभाग अपने स्तर पर जांच की तैयारी में जुटा है। वह यह जानना चाहता है कि उम्मीदवार ने अपनी जितनी प्रापर्टी नामांकन दाखिल करते समय कर रखी है। उसके हिसाब से रिटर्न व अन्य कागजात है अथवा नहीं।
नगर निगम में मेयर के उम्मीदवार को 20 लाख और पार्षद के उम्मीदवार को पांच लाख रुपये खर्च करने का अधिकार है। चुनाव आयोग की ओर से इसकी मॉनिटरिंग की जाती है। लेकिन उम्मीदवारों की ओर से खानापूर्ति की जाती है। आलम यह है कि चुनाव खत्म होने के बाद कोई अपने खर्च का ब्योरा नहीं जमा कराता है। जो चुनाव जीतता है उसे चुनाव जीतने की हनक होती है और जो हारता है वह पांच साल बाद देखने के बारे में सोचता है। नगर निगम चुनाव उम्मीदवारों ने आयोग को चकमा देने के लिए जगह-जगह होर्डिंग्स बैनर व विज्ञापन में निवेदक का नाम डाल देते हैं। आयकर विभागीय जानने में जुटी है कि जो निवदक है कि उसकी हैसियत क्या है। ऐसे में विभाग की ओर से चल रही जांच के मामले में निवेदक भी संपर्क में है। बहुत से उम्मीदवारों की ओर से आय का पूरा ब्यौरा नहीं दिया जाता है ऐसे में आयकर विभाग अपना होमवर्क कर रहा है कि कौन क्या है। पानीपत शहर में चुनाव लड़ने व लड़ाने की भूमिका में सबसे अधिक कारोबारी है। पैसा पानी की तरह बहाया जा रहा है। इस कालेधन पर शिकंजा कसने के लिए आयकर विभाग अपने स्तर पर काम कर रहा है। चुनाव के दौरान आयकर विभाग की ओर से बैंक से होने वाले बड़े ट्रांजेक्शन पर भी नजर रखी जा रही है। सबको पता है कि चुनाव के दौरान कालेधन का इस्तेमाल किया जाता है। उस पर सर्विलांस लगाना चुनौती बना हुआ है।
बयान..
विभाग का पहला उद्देश्य होता है कि कालेधन को बाहर लाना। वह अपने तरीके से सर्विलांस कर रहा है। चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों की प्रापर्टी और आय की तुलना की जाएगी।
अनीता मीना, संयुक्त आयुक्त आयकर विभाग, पानीपत।