पानीपत। वैसे तो पानीपत ब्लॉक में कुल 35 गांव हैं, मगर पंचायत समिति के सदस्य केवल 29 वार्डों से ही चुने जाते हैं। समिति के पिछले पांच साल के कार्यकाल में करीब 10 करोड़ रुपये का बजट आया, लेकिन आधा भी खर्च नहीं हो सका। पंचायत सदस्यों की ओर से चुने गए ब्लॉक के वाइस चेयरमैन राजेश बड़ौली ने तो गांवों के विकास में खर्च नहीं हो पाने का ठीकरा भ्रष्टाचार पर भी फोड़ा।
उन्होंने बताया कि पांच साल के कार्यकाल में सरकार की ओर से करीब 10 करोड़ का अनुदान मिला। इसमें से जितने भी काम हुए, अधिकतर अधूरे ही पड़े हैं। आधे कामों का तो पैसा सिर्फ कागजों में ही लगाया गया है। समिति कार्यकाल के दौरान सरकार भाजपा की थी। ब्लॉक पंचायत समिति का चेयरमैन भी भाजपा का था, लेकिन वह कांग्रेसी रहते हुए पांच साल तक वाइस चेयरमैन बने रहे। इसलिए उनके समेत वार्ड के लोगों के साथ विकास कार्यों में अनदेखी कर अन्याय किया है। वाइस चेयरमैन ने कहा कि अब निर्णय लिया है कि जब तक भाजपा सरकार रहेगी, वे चुनाव नहीं लड़ेंगे।
सालाना करीब दो करोड़ ही मिले। इस बजट में ब्लॉक के 29 गांव शामिल थे। इनमें हर प्रति गांव में 10 लाख रुपये के भी विकास कार्य नहीं हो सके। इससे आज भी समिति के सदस्य परेशान हैं। उनकी ओर से प्रस्तावित काम या तो पूरे नहीं हुए या अधूरे पड़े हैं।
जितने स्वागत द्वार बनाने शुरू किए, उनमें से ज्यादातर आज भी अधूरे हैं। उनके गांव तक के द्वार को कंडम घोषित कर गिरा दिया गया, जो आज तक नहीं बना। इनके अलावा फरीदपुर का गेट अधूरा है। रिसालू के स्कूल में भी काम अधूरे पड़े हैं। बराना के गुरुद्वारे का काम भी पूरा नहीं हुआ। सभी गांव में लोहे के बेंच रखवाए जाने थे, जो आधे गांव में तो पहुंचे भी नहीं। यही काम इंटरलॉकिंग टाइलों में भी हुआ।