पानीपत। नेशनल हेल्थ मिशन के अंतर्गत कार्यरत जिले के 350 एनएचएम कर्मचारी 12 दिन से हड़ताल पर हैं। इनमें 12 डॉक्टर, 33 स्टाफ नर्स, एंबुलेंस चालक, क्लर्क , डाटा एंटी ऑपरेशन समेत स्वास्थ्य विभाग के कई प्रोजेक्ट के अधिकारी व कर्मचारी शामिल हैं। कर्मचारियों ने अब 10 अगस्त तक भूख हड़ताल पर जाने का फैसला किया है। 10 अगस्त तक 10-10 कर्मचारी भूख हड़ताल पर रहेंगे। इनमें पांच महिला कर्मचारी शामिल रहेंगी। एनएचएम कर्मचारियों ने सोमवार को अपनी मांगों को लेकर सिविल सर्जन डॉ. जयंत आहूजा के माध्यम से मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा हैं।एनएचएम कर्मचारियों ने सोमवार को जिला नागरिक अस्पताल के ओपीडी गेट पर एकत्रित होकर सरकार के खिलाफ रोष प्रदर्शन किया। कर्मचारियों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए उनके साथ अन्याय करने का आरोप लगाया है।
एनएचएम कर्मचारियों के हड़ताल पर जाने से सबसे अधिक एंबुलेंस सेवाएं प्रभावित है। एनएचएम के अंतर्गत एंबुलेंस पर तैनात 25 चालक हड़ताल में शामिल हैं। एंबुलेंस सेवाओं को चालू रखने के लिए हरियाणा विकास कौशल निगम से पांच चालक को तैनात किया गया है, लेकिन यह जिला नागरिक अस्पताल से ही एंबुलेंस का संचालन कर रहे हैं। फील्ड में एंबुलेंस के पहिये पूरी तरह से जाम हैं। अगर जिले में कहीं भी कोई हादसा होता है या किसी को एंबुलेंस की जरूरत होती है तो जिला नागरिक अस्पताल से एंबुलेंस भेजनी पड़ती है। ऐसे में एंबुलेंस को घटनास्थल पर पहुंचने में आधा घंटा से भी अधिक वक्त लग रहा है।
एनएचएम की हड़ताल के कारण टीकाकरण अभियान प्रभावित हो रहा है। सिविल सर्जन ने मेडिकल कॉलेज की 41 जीएनएम छात्राओं को प्रशिक्षण दिलाकर उन्हें टीकाकरण अभियान में उतारा है। डिलीवरी सेवाएं सुचारू रखने के लिए 12 नर्सिंग ऑफिसर को फील्ड से बुलाया गया है। अब जिला नागरिक अस्पताल में प्रतिदिन 35-40 डिलीवरी हो रही है। फिजियोथैरेपी सेवाएं 12 दिन से पूरी तरह से बंद है। यहां हर रोज इलाज के लिए 30-40 मरीज आते हैं। इनमें अधिकतर बुजुर्ग शामिल हैं। इनको बिना इलाज ही घर लौटना पड़ रहा है। एनएचएम की हड़ताल से एसएनसीयू वार्ड की सेवाएं भी प्रभावित हो रही है।
वर्जन-
मांगे न माने जाने तक रहेंगे हड़ताल पर - मलिक
एनएचएम संघ के जिलाध्यक्ष अमित मलिक ने कहा सरकार ने उनकी मांगे नहीं मानी है । इसलिए हड़ताल का अनिश्चितकालीन कर दिया गया है। उनकी हड़ताल से लोगों को परेशानी हो रही है। इसकी जिम्मेदार सरकार है। सरकार उनके साथ अन्याय कर रही है। इसलिए उन्हें हड़ताल पर जाना पड़ा। वह एनएचएम के अंतर्गत कार्यरत हैं। आज तक उनको सातवां पे स्केल नहीं दिया गया है। वह सालों से अपनी मांगों को लेकर संघर्ष करते आए हैं। स्वास्थ्य विभाग पूर्ण रूप से एनएचएम कर्मचारियों पर निर्भर है लेकिन उनका शोषण हो रहा है। उनकी मांग है कि उन्हें सातवां पे स्केल दिया जाए। उनको पक्का किया जाए, ईएल , चिकित्सा सुविधा, सेवानिवृति पर ग्रेज्युटी व नौकरी की सुरक्षा जाए।