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कामकाजी महिला अच्छी मां नहीं हो सकती यह संकीर्ण मानसिकता:उच्च न्यायालय

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चंडीगढ़। एक याचिका पर सुनवाई करते हुए पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय ने टिप्पणी की कि कामकाजी महिला अच्छी मां नहीं साबित हो सकती, यह संकीर्ण मानसिकता है। इस टिप्पणी के साथ ही न्यायालय ने बच्चे के दादा- दादी की याचिका को खारिज कर दिया।
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चंडीगढ़ निवासी लक्ष्मी रॉय ने याचिका दाखिल करते हुए कहा कि उनके पोते की कस्टडी को लेकर फैमिली कोर्ट में मामला विचाराधीन है। याचिकाकर्ताओं को पक्ष बनाने के लिए उन्होंने अर्जी दी थी, जिसे फैमिली कोर्ट ने खारिज कर दिया। याचिकाकर्ताओं ने कहा कि बच्चे के मां बाप दोनों वकील हैं और बच्चों की देखभाल अक्सर याचिकाकर्ता ही करते थे। ऐसे में उन्हें इस मामले में पक्ष बनाना चाहिए था। उच्च न्यायालय ने याचिका खारिज करते हुए कहा कि यह अदालत का अधिकार है कि वह तय करे कि किसे पक्ष बनाना है और किसे नहीं। इसके साथ ही याचिकाकर्ताओं द्वारा दी गई दलील की उच्च न्यायालय ने कड़े शब्दों में निंदा करते हुए कहा कि कोई महिला यदि कामकाज करती है तो इसका मतलब यह नहीं कि वह बच्चे के प्रति लापरवाह है। वह भले ही काम करती हो लेकिन उसके साथ वह एक मां भी होती है। ऐसे में किसी भी महिला खास तौर पर महिला वकील के लिए इस प्रकार की बात बर्दाश्त नहीं की जा सकती।
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