पंचकूला। पंचकूला में सेक्टर-6 सिविल अस्पताल की मनोचिकित्सा ओपीडी में लगातार मरीजों की संख्या बढ़ रही है। मनोचिकित्सक विभाग के हेड डॉ. एमपी शर्मा के अनुसार बदलती जीवनशैली और काम का दबाव लोगों को मानसिक तनाव में डाल रहा है। इस कारण अस्पताल में मनोरोग के मामले बढ़ रहे हैं। प्रतिदिन लगभग 200 मरीज ओपीडी में आते हैं जिनमें से 20 मरीज ऐसे हैं जो अपनों से दूरी और काम के बोझ के कारण काउंसलिंग के लिए अस्पताल पहुंच रहे हैं।
केस-1:
हादसे में पति की गई जान, सदमे में महिला
सेक्टर-15 की एक महिला के पति की दो माह पहले सड़क दुर्घटना में मौत हो गई थी। वह मानसिक रूप से गहरे सदमे में हैं। महिला अक्सर रोती रहती हैं। खाना ठीक से नहीं खाती और नींद न आने की समस्या से भी जूझ रही हैं। काउंसलिंग के दौरान चिकित्सक ने परिजनों को सलाह दी कि महिला को धीरे-धीरे रियल लाइफ से जोड़ें और उनका ध्यान किसी काम में लगाकर सदमे से बाहर निकालने की कोशिश करें।
केस-2 :
एक 45 वर्षीय पुलिसकर्मी नाइट ड्यूटी और काम के बोझ के कारण तनाव में है। काम के दबाव के कारण वह अपने परिवार को समय नहीं दे पा रहे हैं और मानसिक असंतुलन महसूस कर रहे हैं। काउंसलिंग में चिकित्सक ने उन्हें सुझाव दिया कि दिन में कम से कम आधा-एक घंटा स्वयं के लिए निकालें। परिवार के साथ समय बिताएं और अपनी बातों को साझा करें।
कोट
तनाव से बचाव के लिए लोगों को परिवार के साथ समय व्यतीत करना चाहिए और अपनी बातों को साझा करना चाहिए। इससे लोग अकेला महसूस नहीं करेंगे और परिवार के साथ तालमेल बना रहना जरूरी है। काम को सीमित दायरे में रखें और इसे अपने ऊपर हावी न होने दें। निजी और सरकारी दफ्तरों सहित अन्य जगहों से ऐसे मामले अस्पताल में आ रहे हैं। मानसिक स्वास्थ्य के लिए समय पर काउंसिलिंग और परिजनों का सहयोग बेहद जरूरी है।
- डॉ. एमपी शर्मा, एचओडी, मनोचिकित्सक विभाग, सेक्टर-6 सिविल अस्पताल