पंचकूला। चार दिन तक मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा-अर्चना के बाद दशमी के दिन वीरवार को सेक्टर-5 की मंडी ग्राउंड में दुर्गा पूजा का समापन किया गया। बंगिया परिषद की शादीशुदा महिलाओं ने दुर्गा माता की पूजा-अर्चना की। ढोल की थाप पर माता को सिंदूर लगाकर महिलाओं ने एक दूसरे को सिंदूर लगाया। शाम के वक्त घग्गर नदी में माता की प्रतिमा का विसर्जन किया गया। लोगों ने नृत्य किया। बंगिया परिषद पंचकूला के अध्यक्ष सुमंतो घोष ने बताया कि दुर्गा पूजा का आयोजन 36 साल से किया जा रहा है। दुर्गा पूजा उत्सव में सिंदूर की होली खेलने की परंपरा बंगाल में प्रचलित है। शारदीय नवरात्र के दसवें दिन मां दुर्गा जब वापस जाती हैं तो उनकी विदाई के सम्मान में सिंदूर की होली खेली जाती है। सुमंतो घोष ने बताया कि पौराणिक मान्यताओं के अनुसार मां दुर्गा नवरात्र में नौ दिनों के लिए अपने घर यानी मायके आती हैं। इस दिन ज्यादातर महिलाओं बंगाली साड़ी ही पहनती हैं। लाल बॉर्डर वाली सफेद साड़ी इस पर्व की पहचान है।
क्यों मनाई जाती है यह रस्म
नौ दिन तक नवरात्र का त्योहार मनाया जाता है। बंगाल में ऐसी मान्यता है कि मां दुर्गा दस दिन के लिए अपने मायके आती हैं। इसी उपलक्ष्य में उनके स्वागत के लिए बड़े-बड़े पंडालों में मां दुर्गा की प्रतिमा स्थापित की जाती है। बंगाली समुदाय में दुर्गा पूजा पंचमी तिथि से शुरू होती है, जिसका अंत दशमी तिथि के दिन सिंदूर की होली खेलकर किया जाता है। इस दिन सिंदूर की होली खेलकर मां दुर्गा को विदा किया जाता है, इसलिए बंगाली समुदाय में इसे सिंदूर खेला के नाम से जानते हैं।