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Panchkula News: बिना ट्यूशन व बिना एक्स्ट्रा क्लास, मोरनी की कोमल ने रचा इतिहास

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मोरनी। हरियाणा बोर्ड के 12वीं कक्षा के परिणामों में राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय थापली की छात्रा कोमल ने जिला पंचकूला में आर्ट संकाय में प्रथम स्थान प्राप्त कर सबको हैरत में डाल दिया है। साधनों की कमी, ट्यूशन या एक्स्ट्रा क्लास का सहारा न लेने के बावजूद कोमल ने अपने मेहनत और आत्मविश्वास से यह सिद्ध कर दिया कि अगर इरादे मजबूत हों तो कोई भी बाधा रास्ता नहीं रोक सकती।
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कोमल एक साधारण परिवार से आती हैं। उनके पिता लेखराज एक राजमिस्त्री हैं, जबकि मां सिर्फ 10वीं तक पढ़ी हैं और गृहिणी हैं। घर में शैक्षणिक वातावरण सीमित था। दादा 10वीं पास, दादी पूरी तरह अनपढ़। फिर भी पूरे परिवार ने कोमल को हमेशा पढ़ाई के लिए प्रेरित किया। माता-पिता ने शुरू से ही उसे यही सिखाया कि जो स्कूल में पढ़ाया जाता है, उसे ही पूरी लगन से समझो और दोहराओ।



कोमल ने न कोई ट्यूशन किया और न कोई कोचिंग, बल्कि स्कूल के शिक्षकों के मार्गदर्शन और अपनी मेहनत से यह उपलब्धि प्राप्त की। उसकी माता ने बताया, “हमारी बेटी ने पूरे साल मेहनत की। जहां दूसरे बच्चे परीक्षा के समय पढ़ाई शुरू करते हैं, कोमल ने शुरू से ही निरंतर पढ़ाई की। स्कूल से आकर वह वही दोहराती थी जो कक्षा में पढ़ाया गया।”
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कोमल का कहना है कि उसका उद्देश्य सिर्फ अच्छे अंकों से 12वीं पास करना था, लेकिन मेहनत रंग लाई और वह जिले की टॉपर बन गई। 10वीं कक्षा में भी कोमल ने 85% अंक प्राप्त किए थे। आर्थिक स्थिति औसत होने के बावजूद परिवार ने उसे कभी हतोत्साहित नहीं किया। पिता लेखराज ने भावुक होते हुए कहा, “मैंने तो मजदूरी की है, लेकिन मेरी बेटी ने हमें गौरव महसूस कराया है। हमने कभी ज्यादा पढ़ाई नहीं की, लेकिन उसे पढ़ाने का सपना हमेशा देखा।”



कोमल की सफलता इस बात का प्रमाण है कि बड़े सपनों को उड़ान देने के लिए महंगे संसाधनों की नहीं, बल्कि निरंतर मेहनत, अनुशासन और परिवार के सहयोग की जरूरत होती है।

कोमल अब आगे की पढ़ाई में भी अपनी रुचि के अनुसार विषय लेकर आगे बढ़ना चाहती है। माता-पिता का भी कहना है कि वे उस पर कोई दबाव नहीं डालेंगे और जो उसकी इच्छा होगी, उसमें पूरा सहयोग देंगे। यह सफलता कोमल की नहीं, बल्कि उन हजारों छात्रों की उम्मीद है, जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़ी उपलब्धियों का सपना देखते हैं।
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