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एएमआईई को इंजीनियरिंग समकक्ष मानने पर मुख्य सचिव से जवाब तलब

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चंडीगढ़। पदोन्नति से जुड़े एक विवाद पर सुनवाई के दौरान पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने हरियाणा के मुख्य सचिव से पूछा है कि आखिर क्यों एसोसिएट मेंबर्स ऑफ इंस्टीट्यूशन ऑफ इंजीनियरिंग (एएमआईई) को हरियाणा में इंजीनियरिंग के समकक्ष माना जा रहा है। अगली सुनवाई पर मुख्य सचिव को हलफनामे के माध्यम से इस पर पक्ष रखना होगा।
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पंचकूला निवासी एमपी शर्मा ने एडवोकेट विजय पाल के माध्यम से हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करते हुए हरियाणा अर्बन डेवलपमेंट अथॉरिटी (हुडा) को 2006 से पदोन्नति देने का निर्देश जारी करने की अपील की थी। याची ने बताया कि उसे 2020 में जेई से एसडीओ प्रमोट किया गया था। इस प्रमोशन को 2006 से प्रभावी बनाया गया था। इसके बाद इस आदेश को वापस लेकर 2019 से उसका प्रमोशन प्रभावी करने का आदेश जारी कर दिया गया। हाईकोर्ट ने हरियाणा सरकार को नोटिस जारी कर पूछा कि क्यों न 2019 से प्रमोशन के आदेश पर रोक लगा दी जाए।
इस दौरान कोर्ट को बताया गया कि याचिकाकर्ता व उसके कुछ जूनियर के पास एएमआईई की डिग्री है। हाईकोर्ट ने कहा कि जब ऑल इंडिया काउंसिल ऑफ टेक्निकल एजुकेशन (एआईसीटीई) प्रभावी है तो आखिर क्यों सेवा नियमों को ताक पर रखकर एएमआईई को इंजीनियरिंग के समकक्ष माना जा रहा है। आल इंडिया काउंसिल ऑफ टेक्निकल एजुकेशन (एआईसीटीई) के अनुसार मान्यता प्राप्त कॉलेज से रेगुलर इंजीनियरिंग की डिग्री के अतिरिक्त कोई भी इंजीनियरिंग की डिग्री वैध नहीं है। ऐसे में कैसे आज भी इस प्रकार की डिग्री को इंजीनियरिंग के समकक्ष माना जा रहा है। हाईकोर्ट ने इस मामले में अगली सुनवाई पर हरियाणा के मुख्य सचिव को हलफनामे के माध्यम से पक्ष रखने का आदेश जारी किया है।
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