चंडीगढ़। गोमांस के अंदेशे में गो रक्षक दल के लोगों द्वारा लोगों के घर में छापे मारने पर कड़ा रवैया अपनाया है। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने हरियाणा सरकार से पूछा है कि इन दलों को यह अधिकार किस कानून के तहत दिया है।
मामला मेवात निवासी मुबीन की जमानत से जुड़ा हुआ है। गोरक्षा कानून के तहत मुबीन पर एफआईआर दर्ज की गई थी। मुबीन के खिलाफ दर्ज मामले में आरोप है कि स्थानीय गो रक्षा दल के अध्यक्ष के नेतृत्व में याचिकाकर्ता के घर पर छापा मारा गया और वहां एक बैल, एक गाय और एक बछड़ा पाया गया। याचिकाकर्ता मौके से भाग गया और उसे पकड़ा नहीं जा सका। दल ने नूंह में एफआईआर दर्ज करवाई थी। बहस के दौरान याची के वकील ने कहा कि गोहत्या और बीफ की बिक्री पर प्रतिबंध है, लेकिन इस मामले हत्या हुई ही नहीं।
याची के वकील ने कहा कि छापा मारने का अधिकार पुलिस को है, किसी गो रक्षा दल को नहीं। इस मामले में छापा पुलिस ने नहीं बल्कि गो रक्षा दल के अध्यक्ष ने मारा था जो इसके लिए अधिकृत ही नहीं था। याची पक्ष की ओर से कहा गया कि याचिकाकर्ता ने कोई अपराध नहीं किया बल्कि गो रक्षा दल ने अवैध रूप से छापा मारकर खुद अपराध किया है। हाईकोर्ट ने इस पर हरियाणा सरकार को कड़ी फटकार लगाते हुए पूछा कि आखिर इसमें गो रक्षा दलों को छापा मारने के लिए अधिकृत किया है और यदि वह अधिकृत नहीं है तो ऐसा क्यों हो रहा है।