सेक्टर-16 सनातन धर्म मंदिर में हुई श्रीराम कथा में सुनाया शिव धनुष भंग और राम-सीता विवाह का प्रसंग
संवाद न्यूज एजेंसी
पंचकूला। सेक्टर-16 सनातन धर्म मंदिर में श्रीराम कथा में बुधवार को कथा व्यास कीर्ति किशोरी ने श्रीराम विवाह की कथा सुनाई। उन्होंने कहा कि कथा सुनने से जीवन की हर व्यथा मिट जाती है। राम विवाह एक आदर्श विवाह है। तुलसीदास ने राजा दशरथ, राजा जनक, राम व सीता की तुलना करते हुए बताया है कि ऐसा समधी, ऐसा नगर, ऐसा दूल्हा, ऐसी दुल्हन की तीनों लोक में कोई बराबरी नहीं हो सकती। कार्यक्रम में दृष्टि आई हॉस्पिटल के डॉ. अशोक गुप्ता व अन्य ने कथा व्यास कीर्ति किशोरी को स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया।
कीर्ति किशोरी ने बताया कि राजा जनक ने अपनी बेटी के लिए स्वयंवर रचाया। उन्होंने एक प्रतिज्ञा रखी कि जो शिव पिनाक को खंडन करेगा वो सीता से नाता जोड़ेगा। उस धनुष को तोड़ने के लिए कई राजा व राजकुमार पहुंचे लेकिन सभी विफल रहे। ऐसे में राजा जनक ने सभा में कहा कि आज धरती वीरों से विहीन हो गई है, सभी अपने घर जाएं। इसके बाद लक्ष्मण को क्रोध आया और उन्होंने कहा कि अगर श्रीराम की आज्ञा हो तो धनुष क्या, पूरे ब्रह्मांड को गेंद की तरह उठा लूं।
कीर्ति किशोरी ने कहा कि धनुष अहंकार का प्रतीक है व राम ज्ञान का प्रतीक। जब अहंकारी व्यक्ति को ज्ञान का स्पर्श होता है तब अहंकार का नाश हो जाता है। श्रीराम में वो अहंकार नहीं था और उन्होंने धनुष उठाया और उनका विवाह सीता से हुआ। माता सीता ने रामजी के गले में वर माला डालकर उन्हें पति के रूप में स्वीकार किया। राम कथा में सीता की विदाई हुई। उन्होंने कहा कि जनकपुर से जब सीताजी की विदाई हुई तब उनके माता-पिता ने उन्हें ससुराल में कैसे रहना है इसकी सीख दी। प्रत्येक माता-पिता को अपनी पुत्री के विवाह के समय ऐसी ही सीख देनी चाहिए। कन्या को ऐसा कोई कार्य नहीं करना चाहिए जिससे ससुराल व मायका दोनों कुल कलंकित हो। माता सीता ने पूरे जीवन अपने माता पिता की सीख का पालन किया और जीवन में कष्ट सहन करते हुए भी कोई अनुचित कार्य नहीं किया।