संवाद न्यूज एजेंसी
पंचकूला। सेक्टर-12 ए हरिहर मंदिर में चल रही श्रीराम कथा में मंगलवार को कथावाचक गुरु मां मुक्तानंद गिरी ने कहा कि शास्त्र हमारे जीवन की दशा और दिशा बदल देते हैं। हमें अपने शास्त्रों की बात सुननी और माननी चाहिए। पुराण-कथा-शास्त्र वह सरलतम माध्यम माना जा सकता है। जिसके द्वारा प्रारंभिक मानव ने अपने धार्मिक विचारों को प्रकट किया। वैदिक धर्म को प्रकृति परक कहा गया है, क्योंकि, दूसरे शब्दों में, इस धर्म में मुख्य रूप से प्राकृतिक शक्तियों एवं घटनाओं की पूजा की जाती थी, हालाँकि यह पूर्णत: सही नहीं है।
कथा व्यास मां मुक्तानंद ने कहा कि वैदिक धर्म एवं परिणामत: वैदिक पुराण-कथा शास्त्र एक विकास की परंपरा में है और उनका अध्ययन वैदिक लोगों के सांस्कृतिक इतिहासानुक्रम से संबंधित करके ही किया जा सकता है। अपने सांस्कृतिक इतिहासानुक्रम से संबंधित करके ही किया जा सकता है। अपने सांस्कृतिक जीवन के प्रारंभिक काल में वैदिक आर्य, या उनके पूर्वज, प्रकृति के अंग के रूप में उसके अधिकाधिक समीप थे।
मंदिर के प्रधान विजय अग्रवाल ने बताया कि 15 मई को पूर्णाहूति डाली जाएगी। उसके बाद प्रसाद वितरण होगा। इस दौरान सतपाल गुप्ता, सुरेश अग्रवाल, नरेश गोयल, जेके सिंगला, सुरेंद्र गुप्ता, रजनीश बंसल, अशोक सिंघल, मुकेश बंसल, जगमोहन खन्ना, प्रमोद जिंदल, अशोक अग्रवाल, अरुण सिंघल, अशोक खन्ना, अशोक विज, आरती ठाकुर उपस्थित रहे। सज्जन जिंदल ने मंच संचालन किया। कथा में महिलाओं ने भाग लेकर कथा का श्रवण किया।