अमर उजाला ब्यूरो
पटियाला। पटियाला में टांगरी नदी में बुधवार के मुकाबले जलस्तर घटकर 11.5 फीट हो गया है, लेकिन यह अभी भी खतरे के निशान के नजदीक बना है। नदी में इस समय 28523 क्यूसेक पानी बह रहा है। बाकी नदियों में पानी का स्तर न घटा है और न ही बीते दिन के मुकाबले और बढ़ा है, लेकिन एहतियात के तौर पर ड्रेनेज विभाग लगातार अलर्ट मोड़ में है।
ड्रेनेज विभाग से प्राप्त आंकड़ों के मुताबिक पटियाला-पिहोवा रोड पर टांगरी नदी में जलस्तर 11.5 फीट पर है। टांगरी में खतरे का निशान 12 फीट पर है। इसी तरह पटियाला-पिहोवा रोड पर मारकंडा नदी में बुधवार की तरह वीरवार को भी जलस्तर 19.2 फीट बना है। मंगलवार को यह 17.6 फीट था। नदी में 28794 क्यूसेक पानी बह रहा है। पटियाला नदी में भी इस समय जलस्तर 1 फीट है। गांव भांखरपुर के पास घग्गर दरिया में पानी का स्तर 1 फीट है और 1350 क्यूसेक पानी बह रहा है। गांव सराला कलां के पास घग्गर नदी में पानी का स्तर 3.5 फीट और 1043.36 क्यूसेक पानी बह रहा है। गांव सनौलिया के नजदीक पच्चीस दर्रा नाला में जलस्तर 1.0 फीट है और यहां 442 क्यूसेक पानी बह रहा है।
इसी बीच वीरवार को पंजाब के सेहत मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने पटियाला में डीसी डॉ. प्रीति यादव और ड्रेनेज विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक कर घग्गर दरिया, टांगरी, मारकंडा, मीरापुर चौ और पच्चीस दर्रा समेत जिले की प्रमुख नदियों और नालों के जलस्तर की स्थिति की समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी जल स्रोतों पर लगातार निगरानी रखी जाए और किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए प्रशासन पूरी तरह सतर्क रहे।
डॉ. बलबीर सिंह ने विशेष रूप से पटियाला शहर के निचले इलाकों में बरसात के दौरान जलभराव की समस्या पर चिंता जताते हुए अधिकारियों को इसके स्थायी समाधान के लिए ठोस प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि मानसून के दौरान जब नदियों का जलस्तर पहले ही ऊंचा होता है, तो शहर का वर्षा जल उनमें समाहित नहीं हो पाता। ऐसे में जरूरी है कि इन इलाकों में विशेष स्टॉर्म वाटर पाइपलाइन बिछाकर वर्षा जल की वैकल्पिक निकासी की व्यवस्था की जाए। सेहत मंत्री ने सीवरेज बोर्ड के अधिकारियों से बड़े दरिया में गिरने वाले गंदे पानी और एसटीपी की प्रगति पर भी जानकारी ली।
एक्सईएन हरशरणजीत सिंह ने बताया कि दौलतपुर में 15 एमएलडी क्षमता वाला सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) तैयार किया जा रहा है, जो दरिया में गिरने वाले गंदे पानी का शोधन करेगा। वहीं सनी एनक्लेव के पीछे 26 एमएलडी का एसटीपी स्थापित किया जा रहा है, जिसमें पुडा (15 एमएलडी), सनौर (4 एमएलडी) और अन्य कॉलोनियों (2 एमएलडी) के सीवरेज का ट्रीटमेंट होगा। इस प्लांट की क्षमता अतिरिक्त 5 एमएलडी तक बढ़ाई गई है। दोनों एसटीपी अक्तूबर तक पूरी तरह चालू हो जाएंगे।