आरएफआरएफ के साथ एमओयू का पार्टी ने किया विरोध
सीनेट में एमओयू के अनुमोदन का विरोध करेगी शिअदः रोमाणा
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। शिरोमणि अकाली दल (शिअद) ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से संबद्ध रिसर्च फाॅर रिसर्जेंस फाउंडेशन (आरएफआरएफ) के साथ समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए जाने की निंदा करते हुए कहा है कि पंजाब यूनिवर्सिटी (पीयू) के अधिकारियों ने यूनिवर्सिटी को अप्रत्यक्ष तौर पर आरएसएस को सौंपने की तैयारी कर ली है। शिअद ने एलान किया है कि फिलहाल उक्त एमओयू को अनुमोदन के लिए सीनेट में पेश किया जाना है, जहां पार्टी इसका पुरजोर विरोध करेगी।
शिअद मुख्यालय में बुधवार को प्रेस कांफ्रेंस को संबोधित करते हुए शिअद के महासचिव परमबंस सिंह रोमाणा ने कहा कि आरएसएस हमारे शैक्षणिक संस्थानों पर कब्जा करना चाहता है और पीयू के कुलपति इस कवायद में मिलीभगत कर रहे हैं। कुलपति ने 21 मार्च को आरएफआरएफ द्वारा प्रस्तुत एमओयू की जांच के लिए एक कमेटी का गठन किया था, जिसे आरएसएस के सहायक संगठन- भारतीय शिक्षा मंडल द्वारा स्थापित किया गया है। कमेटी द्वारा प्रस्ताव को मंजूरी दिए जाने के बाद इसे 23 अप्रैल को सिंडिकेट के समक्ष अनुमोदन के लिए रखा गया, जिसने शुरू में आपत्तियों के कारण मंजूरी स्थगित कर दी लेकिन आखिरकार 27 मई को इसे मंजूरी दे दी गई।
रोमाणा ने आरोप लगाया कि ऐसा लगता है कि पीयू के कुलपति ने यूनिवर्सिटी को आरएफआरएफ को सौंपने पर सहमति दे दी है। एमओयू ने पीयू के लिए आरएफआरएफ की गतिविधियों को प्रचारित करना और संस्थान के बारे में जागरूकता पैदा करना, बुनियादी ढांचे और शैक्षणिक सहायता प्रदान करना, फैकल्टी और छात्र विनियम कार्यक्रमों को बढ़ावा देना और डाक्टरेट थीसिस सहित डिग्री देने के लिए आरएफआरएफ को मान्यता देना अनिवार्य कर दिया गया है। इस तथ्य के बावजूद कि आरएफआरएफ न तो काॅलेज, डीम्ड यूनिवर्सिटी या यूनिवर्सिटी से संबद्ध है।
रोमाणा ने कहा कि अगर पीयू को इस तरह से एमओयू को मंजूरी देनी है तो उसे विश्वविद्यालय को एक शाखा में बदल देना चाहिए और अप्रत्यक्ष तरीके अपनाने के बजाय सीधे आरएसएस को डिग्री देने के अधिकार स्थानांतरित कर देने चाहिए। उन्होंने सिंडिकेट में प्रस्ताव पर आपत्ति नहीं जताने के लिए पंजाब सरकार के प्रतिनिधि-उच्च शिक्षा के निदेशक की भी निंदा की। उन्होंने कहा कि अकाली दल इसका पुरजोर विरोध करेगा और पार्टी अध्यक्ष सुखबीर बादल भी इस मुद्दे को उच्चतम स्तर पर उठाएंगे। एमओयू को सदन में मंजूरी के लिए पेश किए जाने से पहले अकाली दल सीनेट के सदस्यों से भी संपर्क करेगा।