चंडीगढ़। पंजाब व हरियाणा हाईकोर्ट ने पंजाब यूनिवर्सिटी चंडीगढ़, पंजाबी यूनिवर्सिटी पटियाला व जीएनडीयू के हजारों कर्मियों को बड़ी राहत दी है। कोर्ट ने पंजाब सरकार को आदेश दिया कि यूनिवर्सिटी के कर्मियों को भी सचिवालय कर्मियों की तरह ही वेतन व भत्तों का भुगतान किया जाए। हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार के कर्मियों को लाभ से वंचित रखने वाले आदेश को शुक्रवार को रद्द कर दिया। इस मामले में सबसे पहले गुरुनानक देव यूनिवर्सिटी के कर्मियों ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी। कहा था कि 1979 से उन्हें सचिवालय कर्मियों की तरह वेतन और भत्तों का भुगतान हो रहा था। इसको यूनिवर्सिटी की फाइनेंस कमेटी और सीनेट ने मंजूरी दी थी। सरकार ने भी इसे स्वीकारकिया था, लेकिन 2019 में पंजाब सरकार ने आदेश जारी करते हुए यूनिवर्सिटी के कर्मियों को सचिवालय कर्मियों से अलग मानते हुए समान लाभ देने से इनकार कर दिया था। इसके बाद पीयू चंडीगढ़ और पीयू पटियाला के कर्मियों ने भी हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर दी थी। जस्टिस नामित कुमार ने इस आदेश को चुनौती देने वाली 11 याचिकाओं पर फैसला सुनाते हुए पंजाब सरकार के आदेश को अवैध मानते हुए रद्द कर दिया। कहा कि चार दशक से मिल रहे लाभ को अचानक यूनिवर्सिटी कैसे रोक सकती है। वह भी तब जब निर्णय सीनेट और सिंडीकेट में लिया गया था जिसमें सरकार के उच्च अधिकारी शामिल थे। हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार को नसीहत देते हुए कहा कि यूनिवर्सिटी की स्वायत्ता में दखल नहीं देना चाहिए। ऐसे में अब इन यूनिवर्सिटी के कर्मियों को चार दशक से मिल रहे लाभ आगे भी जारी रहेंगे।