चंडीगढ़। फर्जी जाति सर्टिफिकेट से होम्योपैथिक मेडिकल अफसर की नौकरी हासिल करने वाली दो महिलाओं की पोल उनकी रिटायरमेंट के बाद हुई जांच में खुली है। सरकार ने दोनों के सर्टिफिकेट रद्द कर दिए हैं। इनमें दविंदर कौर जिला लुधियाना और अमृत कौर निवासी पटियाला शामिल हैं। दोनों मामलों में डिप्टी कमिश्नर पटियाला और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग को पत्र भेजते हुए बनती कानूनी कार्रवाई के लिए लिखा गया है। कैबिनेट मंत्री डॉ. बलजीत कौर ने बताया कि डॉ. दविंदर कौर जन्म से लोहार जाति से संबंध रखती थी, लेकिन उसने अनुसूचित जाति के व्यक्ति के साथ विवाह करवाने के बाद अपने पति के नाम पर अनुसूचित जाति का सर्टिफिकेट प्राप्त किया। इसके आधार पर उसने होम्योपैथिक मेडिकल अफसर की सरकारी नौकरी हासिल की। वहीं डॉ. अमृत कौर पटियाला की निवासी थी। वह जन्म से अरोड़ा जाति से संबंध रखती थी। उसने अनुसूचित जाति के व्यक्ति के साथ विवाह करवाने के बाद अपने पति के नाम पर अनुसूचित जाति का सर्टिफिकेट प्राप्त किया था। इसके आधार पर उसने होम्योपैथिक मेडिकल अफसर की नौकरी हासिल की थी।
ऐसे बनाए थे दोनों ने सर्टिफिकेट
जांच रिपोर्ट में सामने आया है कि अनुसूचित जाति का लाभ वह व्यक्ति ही प्राप्त कर सकता है जो जन्म से अनुसूचित जाति से संबंध रखता हो। इन दोनों मामलों में यह सर्टिफिकेट अनुसूचित जाति के व्यक्ति के साथ विवाह करवाने के बाद हासिल किया गया है, जो किसी भी तरह के लाभ के लिए वैध नहीं है। इस कारण राज्य स्तरीय स्क्रूटनी समिति द्वारा इनके विरुद्ध कार्रवाई करने की रिपोर्ट विभाग को सौंपी गई है।