चंडीगढ़ सेक्टर 42 के रहने वाले अनीश गोयल अपने उज्ज्वल भविष्य के लिए कनाडा में पढ़ाई करने गए थे। उनके मां-बाप ने बड़ी मुश्किल से उन्हें पढ़ाया-लिखाया। जब वर्किंग परमिट या पीआर अप्लाई किया तो पता चला कि जिस कॉलेज से उन्होंने डिग्री या डिप्लोमा हासिल किया था, वह फर्जी था। उसकी कोई मान्यता नहीं थी।
अनीश के तो सपने टूटकर चकनाचूर हो गए। अनीश जैसे हजारों लड़के थे, जिन्हें बाद में पता चला कि उनका कॉलेज ही फर्जी था। इससे हजारों युवाओं का भविष्य दांव पर लग गया, लेकिन अनीश ने हार नहीं मानी। वह स्टूडेंट्स को एक मंच पर लेकर आया और कनाडा के कोर्ट में लड़ाई लड़ी।
7 फरवरी को कोर्ट ने अनीश के पक्ष में फैसला सुनाते हुए कहा कि कॉलेज फीस के रूप में 750950 डालर यानी करीब सवा पांच करोड़ रुपये व स्टूडेंट्स की ओर से किए केस खर्च के रूप में करीब 1.40 करोड़ रुपये लौटाने होंगे।
अनीश ने चितकारा कॉलेज से बीटेक की डिग्री लेने के बाद कनाडा के न्याग्रा कॉलेज से पोस्ट ग्रेजुएट कोर्स में दाखिला लिया। तीन वर्ष की पढ़ाई पूरी करने के बाद अनीश ने कनाडा में इमिग्रेशन ऑफिस में वर्क परमिट के लिए अप्लाई किया, लेकिन अधिकारियों ने यह कहकर वर्क परमिट देने से इंकार कर दिया कि न्याग्रा कॉलेज के ऑनलाइन कोर्स मान्य ही नहीं हैं।
अनीश के अलावा साल 2013 से लेकर 16 तक दुनियाभर से आए 2000 से अधिक स्टूडेंट्स न्याग्रा कॉलेज से स्नातक या पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा कर चुके थे। इन सभी स्टूडेंट्स को अनीश ने इकट्ठा किया और जागरूक किया। अनीश गोयल ने इस केस के लिए पांच वर्ष तक खूब संघर्ष किया और उनके इस संघर्ष को आने वाले सालों में याद किए जाएंगे और अन्य लोगों के लिए प्रेरणा स्रोत बनेंगे।