सेशंस कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट का फैसला बरकरार रखा, कहा- धोखाधड़ी साबित करने के लिए साक्ष्य पर्याप्त नहीं
सेना के कर्नल ने प्लाट दिलाने के नाम पर रकम लेने का लगाया था आरोप, चेक बाउंस होने के बाद दर्ज हुआ था केस
संवाद न्यूज एजेंसी
पंचकूला। प्लाट दिलाने के नाम पर सेना के कर्नल से 15.40 लाख रुपये की धोखाधड़ी के मामले में सेशंस कोर्ट ने दो आरोपियों को बरी करने का फैसला बरकरार रखा है। अदालत ने कर्नल बलराम सिंह बड़वाल की ओर से दायर अपील खारिज करते हुए कहा कि रिकॉर्ड पर मौजूद साक्ष्य आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी का अपराध साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं हैं।
शिकायत के अनुसार, वर्ष 2014 में कर्नल की मुलाकात गौरांश एसोसिएट्स के मालिक मनव मल्होत्रा से हुई थी। आरोप था कि मल्होत्रा ने मोहाली के न्यू चंडीगढ़ स्थित डीएलएफ मुल्लांपुर में 24 लाख रुपये में प्लाट दिलाने का भरोसा दिया। इसके बाद 11 नवंबर 2014 को पांच और दो लाख रुपये के चेक तथा 27 दिसंबर को 8.40 लाख रुपये लिए गए। कुल 15.40 लाख रुपये देने के बावजूद न तो एग्रीमेंट हुआ और न प्लाट मिला।
रकम लौटाने के लिए दिए गए चेक भी बाउंस हो गए। पुलिस ने मनव मल्होत्रा और राकेश सादिक के खिलाफ केस दर्ज कर चालान पेश किया था। ट्रायल कोर्ट ने 6 सितंबर 2019 को दोनों को बरी कर दिया था।
सेशंस कोर्ट ने कहा कि शिकायतकर्ता प्लाट की पहचान से जुड़े पर्याप्त दस्तावेज पेश नहीं कर सके। साथ ही, पहले दायर एनआई एक्ट की शिकायत में प्लाट सौदे और राकेश सादिक का उल्लेख नहीं था। अदालत ने इन कमियों को देखते हुए अपील खारिज कर दी।