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Panchkula News: इलाज मुफ्त है...बस सेवा नहीं, शहर का अस्पताल बहुत दूर

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घग्गर पार के सेक्टरों से मरीजों को ऑटो-टैक्सी पर खर्च करने पड़ रहे 200 से 400 रुपयेएक-एक रुपये बचाने वाले मजदूर पैदल पहुंचने को मजबूर
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आदित्य शर्मा
पंचकूला। इलाज मुफ्त है...बस सेवा नहीं, ऐसे में शहर का सबसे बड़ा सिविल अस्पताल मरीजों के लिए बहुत दूर हो गया है। ओपीडी में इलाज और जांच के लिए आने वाले मरीजों को ऑटो और टैक्सी बुक करके अस्पताल पहुंचना पड़ता है। एक-एक रुपये बचाकर घर चलाने वाला मजदूर वर्ग कई बार किराया बचाने के लिए पैदल ही अस्पताल की राह पकड़ता है। बुजुर्ग, गर्भवती महिलाएं और गंभीर मरीज भी सार्वजनिक परिवहन के अभाव में निजी वाहनों पर निर्भर हैं। घग्गर पार के सेक्टरों से अस्पताल आने-जाने में मरीजों और उनके परिजनों को 200 से 400 रुपये तक खर्च करने पड़ रहे हैं। ऐसे में मुफ्त इलाज की सुविधा का लाभ लेने के लिए ही गरीब परिवारों की जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है।

इलाज से ज्यादा पहुंचने की चिंता

सिविल अस्पताल में रोजाना हजारों मरीज ओपीडी, इमरजेंसी, जांच और उपचार के लिए पहुंचते हैं। एमसीएच बिल्डिंग में गायनी, पीडियाट्रिक और ऑपरेशन की सुविधाएं आने के बाद मरीजों की संख्या भी बढ़ी है। लेकिन अस्पताल तक पहुंचने के लिए नियमित सिटी बस सेवा नहीं है। खासकर सेक्टर-25, 26, 27, 28 और आसपास के गांवों के लोगों को पहले मुख्य सड़क तक पहुंचना पड़ता है और फिर ऑटो या टैक्सी लेकर अस्पताल जाना पड़ता है।
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सेक्टर-26 निवासी अनिल शर्मा ने बताया कि दवा और जांच के लिए अस्पताल जाना हो तो हर बार करीब 300 रुपये खर्च हो जाते हैं। यह रकम किसी नौकरीपेशा व्यक्ति के लिए भले छोटी लगे, लेकिन रोज कमाकर घर चलाने वाले परिवार के लिए बड़ा खर्च है। सेक्टर-27 निवासी सुनीता देवी ने बताया कि उनकी सास की हर सप्ताह जांच होती है। ऑटो वाला आने-जाने के करीब 250 रुपये लेता है। बस सेवा होती तो यह खर्च काफी कम हो जाता।

मरीजों की मजबूरी को समझने वाला नहीं
सिटीजंस वेलफेयर एसोसिएशन के प्रधान एसके नैय्यर ने बताया कि संगठन कई वर्षों से प्रशासन को पत्र देकर सिविल अस्पताल के लिए शहरव्यापी बस सेवा की मांग कर रहा है। अस्पताल शहर का सबसे अहम सार्वजनिक स्वास्थ्य केंद्र है, इसलिए वहां तक सस्ती और नियमित परिवहन सुविधा जरूरी है।

स्थानीय परिवहन व्यवस्था मजबूत नहीं
आरडब्ल्यूए सेक्टर-16 के महासचिव सुभाष पपनेजा ने कहा कि पंचकूला में अंतरराज्यीय बस स्टैंड, रोडवेज वर्कशॉप और सरकार के कई महत्वपूर्ण कार्यालय हैं, लेकिन शहर के अंदर स्थानीय परिवहन व्यवस्था मजबूत नहीं हो पाई। हरियाणा रोडवेज ने दो बार सिटी बस सेवा शुरू करने का प्रयास किया, लेकिन संसाधनों की कमी के कारण सेवा बंद हो गई। अभी जो बसें चल रही हैं, उनके रूट भी सीमित हैं।
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हर सप्ताह अस्पताल आने वालों पर सबसे ज्यादा बोझ
जिन मरीजों को एक-दो बार अस्पताल आना होता है, वे किसी तरह किराये का इंतजाम कर लेते हैं, लेकिन नियमित जांच और इलाज कराने वालों के लिए यह रोजमर्रा की परेशानी बन चुकी है। कई परिवारों में बुजुर्गों को सप्ताह में एक या दो बार अस्पताल लाना पड़ता है। ऐसे में हर बार 200 से 400 रुपये का खर्च महीने के बजट को बिगाड़ देता है। गरीब परिवारों के सामने इलाज और आने-जाने के खर्च के बीच चुनाव जैसी स्थिति पैदा हो जाती है। लोगों का कहना है कि सिविल अस्पताल तक नियमित सिटी बस सेवा शुरू होने से मरीजों को सबसे बड़ी राहत मिलेगी। इससे न केवल घग्गर पार के सेक्टरों बल्कि आसपास के गांवों के लोगों को भी कम खर्च में अस्पताल तक पहुंचने की सुविधा मिल सकेगी।
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