चंडीगढ़। काफी मेहनत करने के बाद ट्रांसजेंडर धनंजय चौहान को यूरोप जाने का वीजा मिल गया है। उन्होंने बताया कि एक किन्नर होने के नाते वीजा लेना आसान नहीं था। हर किसी आवेदन में तीसरे वर्ग किन्नर के लिए कोई कॉलम नहीं था, लेकिन वह आवेदन पर खुद ही पैन से ट्रांसजेंडर लिखती रही। चाहे वीजा फार्म हो या ट्रैवलिंग बीमा या फिर इनकम टैक्स रिटर्न हो। हर जगह से उन्होंने अभिलेख एकत्र किए। अब उन्हें यूरोप का वीजा मिल गया है। उन्होंने बताया कि वह पहले भी यूरोप गई थीं, लेकिन तब पासपोर्ट में ट्रांसजेंडर का कोई कॉलम नहीं होता था। उन्होंने बताया कि ग्रीस व इटली में विश्व ट्रांसजेंडर सम्मेलन में वह भाग लेने जा रही हैं। भारत के ट्रांसजेंडर समुदाय का प्रतिनिधित्व करेंगी।