अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। शिरोमणि अकाली दल (शिअद) के वरिष्ठ नेता व पूर्व केंद्रीय मंत्री सुखदेव सिंह ढींडसा का भारतीय जनता पार्टी और अकाली दल के बीच गठबंधन में भी अहम रोल है। ढींडसा के भाजपा के साथ ही सभी राजनीतिक दलों के साथ अच्छे संबंध थे। यही कारण है कि वह आखिरी दम तक भी शिअद और भाजपा के बीच कड़बाहट को दूर करने में लगे रहे।
शिअद के पूर्व प्रधान प्रकाश सिंह बादल के बाद ढींडसा दूसरे नंबर के सबसे बड़े नेता थे। ईमानदारी छबि के नेता के रूप में उनकी पहचान थी। वह 2000 से 2004 तक तीसरे वाजपेयी मंत्रिमंडल में केंद्रीय खेल एवं रसायन एवं उर्वरक मंत्री रहे। इस तरह भाजपा हाईकमान से शुरू से ही ढींडसा के साथ अच्छे संबंध रहे हैं। बादल के साथ दिल्ली में होने वाली महत्वपूर्ण बैठकों में ढींडसा ही बैठे थे और पंजाब के मुद्दों को उठाते थे। इसके अलावा पंथक मुद्दों के उठाने वाले नेता के रूप में भी उनकी पहचान थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ भी उनकी अच्छी बनती थी।
वह जब भी पीएम मोदी से मिलने के लिए दिल्ली गए थे तो हमेशा पीएम की तरफ से उनको मिलने के लिए समय दिया गया। इसी तरह शिअद और भाजपा के बीच दूरियों को कम करने में उनका अहम रोल हो सकता था। साथ ही उनका एक लंबा राजनीतिक करियर रहा है। वह 2022 तक राज्यसभा से सांसद भी रहे। इसी तरह 2004 से 2009 तक लोकसभा में भी सांसद रहे, जिस कारण राष्ट्रीय स्तर की राजनीति में भी सक्रिय रहे।