चंडीगढ़। नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने खेतों में जलभराव की समस्या के समाधान की मांग उठाई है। हुड्डा का कहना है कि कैथल, हिसार, भिवानी, अंबाला, सिरसा, रोहतक, जींद, सोनीपत, कुरुक्षेत्र, करनाल और फतेहाबाद समेत प्रदेश के कई इलाकों में किसान जलभराव की समस्या का सामना कर रहे हैं। किसानों की हजारों एकड़ फसल जलमग्न हो गई है। हफ्तेभर से ज्यादा समय बीतने के बावजूद सरकार ने जल निकासी के लिए कोई कदम नहीं उठाए। धान, कपास और ज्वार की हजारों एकड़ फसल को भारी नुकसान पहुंचा है।
हुड्डा ने कहा कि हालात इसी तरह बने रहे तो मौसम की मार और सरकार की अनदेखी के चलते फसल का बड़ा हिस्सा पानी की भेंट चढ़ जाएगा। इससे धान, कपास, गन्ना व ज्वार समेत अन्य फसलों के उत्पादन पर बड़ा असर पड़ेगा। सरकार को तुरंत गिरदावरी करवाकर किसानों को मुआवजा देना चाहिए। साथ ही जल निकासी का प्रबंध किया जाए। सरकार के एलान और फसल बीमा योजना के बावजूद किसानों को मुआवजा नहीं मिल पाया है। पिछले दिनों सामने आए आंकड़ों से पता चला है कि 5 साल में बीमा कंपनियों ने 40,000 करोड़ का मोटा मुनाफा कमाया है, जबकि किसानों को लगातार घाटे का सामना करना पड़ा। जले पर नमक छिड़कते हुए सरकार ने कई फसलों के बीमा की प्रीमियम राशि बढ़ा दी है। धान के लिए प्रति एकढ़ 713.99 से बढ़ाकर 749.69 रुपये, कपास के लिए 1731.50 से बढ़ाकर 1819.12 रुपये, बाजरा के लिए 335.99 से बढ़ाकर 352.79 रुपये और मक्का के लिए 356.99 से बढ़ाकर 374.85 रुपये प्रीमियम राशि कर दी गई है। हर सीजन में किसान की मर्जी के बिना उनके खाते से प्रीमियम काट लिया जाता है, लेकिन मुआवजा देने के लिए न सरकार आगे आती और ना ही कंपनी।