चंडीगढ़। आर्म्ड फोर्सेस ट्रिब्यूनल में फरवरी 2016 से मार्च 2021 तक भारत सरकार की पैरवी के बावजूद इसके लिए वकील को फीस भुगतान न होने पर पंजाब-हरियाणा ने वेस्टर्न कमांड के लीगल अधिकारी व कंट्रोलर ऑफ डिफेंस अकाउंट्स को तलब कर लिया है। कोर्ट ने हैरानी जताते हुए कहा कि जिन्हें सेना के हितों की रक्षा के लिए केस दिया जाता है उनकी फीस का भुगतान हुआ है या नहीं इसके प्रति कैसे अनभिज्ञ रहा जा सकता है। कोर्ट ने अब इस देरी पर अधिकारियों को स्पष्टीकरण देने का आदेश दिया है जिसमें विफल रहने पर 25 लाख रुपये जुर्माना लगाने की चेतावनी भी दी है। याचिका दाखिल करते हुए एडवोकेट विक्रम बजाज ने हाईकोर्ट को बताया कि वह आर्म्ड फोर्सेस ट्रिब्यूनल में भारत सरकार की ओर से मार्च 2021 तक पैरवी कर रहे थे। इस बीच फीस के बिल समय पर जमा करवाए गए लेकिन इसका भुगतान नहीं किया गया। अभी लगभग 25 लाख रुपये याचिकाकर्ता को लेने हैं लेकिन भुगतान नहीं किया जा रहा। कोर्ट ने कहा कि इस मामले में वकीलों ने अपने बिल जमा करवाए और भुगतान में देरी हुई। देरी का कारण जमा करवाए गए बिलों में आपत्ति बताया गया और नए सिरे से बिल जमा करवाने को कहा गया। इसके बाद बिल का भुगतान करने से यह कहते हुए इन्कार किया जा रहा है कि लंबी अवधि हो जाने के चलते भुगतान नहीं किया जा सकता है। इस पर हाईकोर्ट ने ऑफिसर इन कमांड लीगल से पूछा कि बिलों की मंजूरी के लिए सक्षम प्राधिकारी कौन है, जिस पर उन्होंने अनभिज्ञता जताई।
हाईकोर्ट ने इस पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि ऐसी स्थिति अत्यधिक अस्वीकार्य है। कोर्ट ने कहा कि आमतौर पर न्यायालय अधिकारियों को समन करने का इच्छुक नहीं होता है, लेकिन यह देखते हुए कि लगभग 50 ऐसे मामले लंबित हैं, जिनमें अधिवक्ताओं ने अपनी फीस का दावा किया है और समन किए गए अधिकारी द्वारा गोलमोल जवाब दिया गया है, शायद ही हमारे पास वरिष्ठ अधिकारी को समन करने के अतिरिक्त कोई विकल्प बचा है। ऐसे में कोर्ट ने ओआईसी लीगल व सीडीए को तलब कर लिया है। साथ ही कोर्ट ने कहा कि अब फीस के भुगतान में हुई देरी के लिए अधिकारियों को स्पष्टीकरण देना होगा वरना कोर्ट 25 लाख रुपये का जुर्माना लगा सकता है।