2007 बैच के भर्ती हवलदार, 2008 के बन गए एएसआई
पदोन्नति मामलों में करनाल रेंज सबसे पीछे है। वर्ष 2007 में हुई सिपाही भर्ती की बात करें तो करनाल रेंज के जवान आज तक हवलदार ही बन पाए हैं, जबकि 2008 में भर्ती हुए वो जवान जिनको गुरुग्राम और फरीदाबाद रेंज मिला, एएसआई बन चुके हैं। दरअसल, सिपाही के बाद हवलदार बनने के लिए बी वन की परीक्षा पास करनी होती है। इसके बाद हवलदार से एएसआई के लिए इंटर परीक्षा पास करनी होती है लेकिन यह केवल पदोन्नति वैकेंसी के आधार पर होती है।
डीजी ऑफिस से इन पदों के लिए सीटें अलॉट की जाती हैं, जितनी सीटें मिलती हैं, मात्र उन्हीं को पदोन्नति मिलती है, जबकि उसी बैच के अन्य जवान पीछे रह जाते हैं। इसको लेकर पुलिस कर्मचारियों में भारी रोष रहता है। कई स्तर पर जवान ये मुद्दे उठा चुके हैं लेकिन आज तक पुलिस के आला अधिकारियों ने इन नियमों को बदलने की जहमत नहीं उठाई।
बड़े वाहनों के खिलाफ अभियान चलाने का निर्देश
अंबाला में जीटी रोड पर अपनी लेन में नहीं चलने वाले भारी वाहनों के चालान के बाद विज ने पुलिस अधिकारियों को आदेश कि स्टेट और नेशनल हाईवे पर पुलिस यह तय करे कि बड़े वाहन अपनी ही लेन में चले। इसके लिए बड़े स्तर पर चेकिंग अभियान चलाया जाए। साथ ही सीसीटीवी कैमरे भी लगाए जाएं। वह खुद भी चेकिंग करेंगे ताकि लोगों की जान बचाई जा सके।
कबूतरबाजी रोकने को फिर गठित की एसआईटी
प्रदेश में दोबारा से विदेश भेजने के मामलों में हो रही बढ़ोतरी को देखते हुए दोबारा से एसआईटी गठित की है। करनाल के आईजी सतेंद्र गुप्ता इसके हेड होंगे। बता दें कि इससे पहले करनाल की पूर्व आईजी भारती अरोड़ा इस एसआईटी की चीफ रहीं और उन्होंने कबूतरबाजी के मामलों में 559 आरोपियों को गिरफ्तार किया था।
आधुनिकीकरण पर जोर दे पुलिस
बैठक में गृह मंत्री ने कहा कि पुलिस विभाग आधुनिकीकरण पर जोर दे। सभी पुलिस थानों में बुलेट प्रूफ जैकेट, आधुनिक वाहन व अनुसंधान के लिए आधुनिक उपकरण उपलब्ध कराए जाएं। साथ ही शहरों में बस स्टैंड व अन्य सार्वजनिक स्थलों पर सीसीटीवी कैमरे लगाए जाने के कार्य में तेजी लाई जाए। गृहमंत्री ने कहा कि जब तक फॉरेंसिक विशेषज्ञों की नियमित भर्ती नहीं होती तब तक साइबर क्राइम के मामलों को सुलझाने के लिए प्राइवेट विशेषज्ञों को पैनल पर लिया जाए।