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पंजाब की डिस्पेंसरियों में दवाओं का टोटा, एक तिहाई सेहत केंद्रों में नहीं हैं दवाएं

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चंडीगढ़। पंजाब सरकार द्वारा राज्य में 100 आम आदमी क्लीनिक खोले जाने के अभियान के दौरान ही यह खुलासा हुआ है कि राज्य के सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों और डिस्पेंसरियों में दवाओं की भारी कमी हो चुकी है। इनमें पहुंचने वाले मरीजों को दवा के लिए अब बाजार का रुख करना पड़ रहा है। इनके अलावा ऐसे सभी
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स्वास्थ्य केंद्र और डिस्पेंसरियों में मरीजों और स्टाफ के लिए वॉशरूम भी नहीं हैं जबकि विभिन्न तरह के मेडिकल टेस्टों के लिए पर्याप्त उपकरणों के अलावा एंबुलेंस की सुविधा भी उपलब्ध नहीं है।
जानकारी के अनुसार, केवल 67 प्रतिशत स्वास्थ्य केंद्रों में मरीजों के लिए संतोषजनक दवाएं उपलब्ध नहीं हैं। यह खुलासा राज्य सरकार के अपने वॉलंटियरों (गार्डिनेंस ऑॅफ गवर्नमेंट) की रिपोर्ट में हुआ है। इन वॉलंटियरों की नियुक्ति राज्य में कैप्टन अमरिंदर सिंह सरकार के समय की गई थी, जिन्हें स्वास्थ्य सेवाओं की निगरानी और उसकी रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंपने का जिम्मा दिया गया था। रिपोर्ट में कहा गया है कि सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों और डिस्पेंसरियों में गत जुलाई माह के दौरान दवाओं का स्टाक बीते 14 महीने में सबसे कम रहा है।
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रिपोर्ट के अनुसार, राज्य के अधिकांश जिलों के स्वास्थ्य केंद्रों में साधारण रोगों के लिए जो दवाएं मरीजों को उपलब्ध कराई जाती थीं, वह अब उपलब्ध नहीं रही हैं। इस तरह मरीजों को साधारण दवाएं भी बाजार से खरीदनी पड़ रही हैं। जालंधर जिले के 50 से अधिक स्वास्थ्य केंद्रों में दवाएं समाप्त हो चुकी हैं जबकि 50 अन्य केंद्रों में साफ-सफाई की हालत दयनीय है। अमृतसर जिले में भी 60 स्वास्थ्य केंद्र मरीजों को दवाएं उपलब्ध कराने में असमर्थ हो चुके हैं जबकि होशियारपुर जिले में 50 स्वास्थ्य केंद्रों में दवाएं नहीं हैं। इसी तरह जिला श्री मुक्तसर साहिब के 50 फीसदी सेहत केंद्रों में दवाओं की कमी के अलावा केंद्रों की इमारतों की खस्ता हालत ने चिंता बढ़ा दी है। जिला फाजिल्का की अबोहर तहसील के सभी सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में दवाएं नहीं मिल रहीं जबकि पटियाला में 29 फीसदी, लुधियाना में 50 फीसदी, तरनतारन में 20 और बठिंडा जिले में 15 फीसदी स्वास्थ्य केंद्रों में मरीज दवाओं का इंतजार कर रहे हैं।
इस संबंध में स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि आम आदमी क्लीनिकों के साथ ही इन स्वास्थ्य केंद्रों की हालत भी सुधारने की योजना पर काम शुरू हो चुका है। अगले कुछ महीनों में मरीजों को सभी सुविधाएं और दवाएं मिलनी शुरू हो जाएंगी।
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