सेक्टर-35 स्थित प्राचीन कला केंद्र में मल्हार उत्सव के अंतिम दिन प्रस्तुति देतीं शास्त्रीय गायिक
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चंडीगढ़। प्राचीन कला केंद्र के एमएल कौसर सभागार में आयोजित चार दिवसीय मल्हार उत्सव का वीरवार को समापन हो गया। इस अवसर पर दिल्ली से आई रमा सुंदर रंगनाथन ने शास्त्रीय गायन से समा बांध दिया।
कार्यक्रम की शुरुआत उन्होंने राग मियां मल्हार में निबद्ध विलंबित एक ताल की रचना करीम नाम तेरो से... की। इसके बाद मध्य लय तीन ताल से सजी बंदिश बरसन लागी बदरिया पेश कर वाहवाही बटोरी। उन्होंने द्रुत तीन ताल में निबद्ध अमृत मल्हार में निबद्ध बंदिश आई आई मेघा कारी प्रस्तुत किया। सभागार में बैठे दर्शकों ने तालियां बजाकर उनका उत्साह बढ़ाया।
कार्यक्रम के अगले भाग में उन्होंने राग कलावती से सजी विलंबित एकताल में निबद्ध रचना ऐ री धन धन नीदंरिया प्रस्तुत की। कार्यक्रम के अंत में उन्होंने प्रसिद्ध शब्द अव्वल अल्ला नूर उपाया.. पेश कर दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। तबला पर अख्तर हसन तथा हारमोनियम पर ललित सिसोदिया ने उनका बखूबी साथ निभाया। प्राचीन कला केंद्र की रजिस्ट्रार डॉ. शोभा कौसर ने बताया कि कार्यक्रम के बाद सभी कलाकारों को सम्मानित किया गया। इस मौके पर केंद्र के सचिव सजल कौसर व अन्य गण्यमान्य मौजूद थे।
कौन हैं रमा सुंदर रंगनाथन
रमा सुंदर रंगनाथन पंडित तेजपाल एवं शांति शर्मा की शिष्या हैं। उन्होंने से संगीत सीखना शुरू किया और अपनी प्रतिभा के बल पर संगीत प्रेमियों के दिल में जगह बनाई। आजकल रमा पद्म विभूषण पंडित एल सुब्रमण्यम के शिष्यत्व में डॉक्टरीयल थीसिस पर कार्य कर रही है। ऑल इंडिया रेडियो की ए ग्रेड कलाकार हैं। उन्होंने विभिन्न कार्यक्रमों में अपनी प्रस्तुति दी हैं।
रिपोर्ट नीरज कुमार