सीबीआई का दावा- बिना मंजूरी आईडीएफसी फर्स्ट बैंक में खुलवाया खाता
169 करोड़ रुपये के नुकसान से जुड़ा मामला
सीबीआई ने परवीन कुमार को गिरफ्तार कर कोर्ट में किया पेश
चार दिन का रिमांड मांगा, अदालत ने तीन दिन की हिरासत दी
संवाद न्यूज एजेंसी
पंचकूला। हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (एचएसपीसीबी) के करोड़ों रुपये के फंड गबन मामले में सीबीआई ने तत्कालीन वरिष्ठ लेखा अधिकारी (सीनियर अकाउंट्स ऑफिसर) परवीन कुमार को गिरफ्तार कर शुक्रवार को पंचकूला स्थित सीबीआई कोर्ट में पेश किया। सीबीआई ने आरोपी की चार दिन की पुलिस रिमांड मांगी थी, लेकिन अदालत ने उसे तीन दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया। जांच एजेंसी का आरोप है कि परवीन कुमार ने नियमों के विपरीत बैंक खाता खुलवाने और सरकारी धन के निवेश व निकासी में अहम भूमिका निभाई।
बिना मंजूरी खुलवाया गया बैंक खाता : सीबीआई
सीबीआई के अनुसार परवीन कुमार उस समय एचएसपीसीबी में वरिष्ठ लेखा अधिकारी और अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता थे, जब सेक्टर-32 स्थित आईडीएफसी फर्स्ट बैंक में खाता खोला गया था। इसी खाते के माध्यम से बोर्ड को 169 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ, जो इस मामले में प्रभावित आठ सरकारी विभागों में सबसे अधिक बताया गया है। जांच एजेंसी का दावा है कि परवीन कुमार के कार्यकाल के दौरान ही करीब 110 करोड़ रुपये की संदिग्ध निकासी हुई। सीबीआई ने अदालत को बताया कि जिस बैंक खाते के जरिए कथित फर्जी लेनदेन किए गए, उसके अकाउंट ओपनिंग फॉर्म पर परवीन कुमार के हस्ताक्षर हैं। विभागीय रिकॉर्ड में इस खाते को खोलने की कोई मंजूरी या स्वीकृति उपलब्ध नहीं है।
जांच में यह भी सामने आया कि खाता खोलने से संबंधित फाइल परवीन कुमार के पास आई थी, जिसे उन्होंने सह-आरोपी को भेजा था। इसके बावजूद वह अब तक यह स्पष्ट नहीं कर पाए हैं कि खाता किस प्रक्रिया के तहत खोला गया।
शेल कंपनियों में भेजी गई करोड़ों की रकम
सीबीआई के अनुसार खाते की पहली चेकबुक विभाग को मिली थी, लेकिन उसकी प्राप्ति दर्ज नहीं की गई और वह कभी बरामद नहीं हुई। दूसरी चेकबुक के माध्यम से करोड़ों रुपये विभिन्न शेल कंपनियों में भेजे गए। इनमें कैपको फिनटेक, स्वास्तिक देश प्रोजेक्ट्स, एएस बुलियन ट्रेडर्स, दिशा ट्रेडर्स, भारत सोलर, मन्नत कॉन्ट्रैक्टर्स और एसआरआर प्लानिंग गुरुस जैसी कंपनियों के नाम शामिल हैं।
जांच एजेंसी का आरोप है कि परवीन कुमार निवेश संबंधी फाइलों को प्रोसेस करते थे और उन्हें वित्त विभाग के 12 जुलाई 2024 के उस परिपत्र की जानकारी थी, जिसमें सरकारी धन के निवेश की अधिकतम सीमा निर्धारित की गई थी। इसके बावजूद उन्होंने वरिष्ठ अधिकारियों को इसकी जानकारी नहीं दी और अपनी टिप्पणियों में भी इसका उल्लेख नहीं किया, जिससे निर्धारित सीमा से अधिक निवेश किया गया। सीबीआई का कहना है कि परवीन कुमार खातों के प्रभारी और अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता होने के बावजूद इस बैंक खाते की जानकारी छिपाते रहे। उन्होंने सरकारी धन को खाते में स्थानांतरित कराया और निवेश सीमा के उल्लंघन की जानकारी भी वरिष्ठ अधिकारियों से साझा नहीं की।
रिमांड की मांग के पीछे यह तर्क
सीबीआई ने अदालत को बताया कि आरोपी से बैंक रिकॉर्ड, डिजिटल साक्ष्यों और अन्य दस्तावेजों के आधार पर आमने-सामने पूछताछ की जानी है। एजेंसी के अनुसार आरोपी ने निजी बैंकों के प्रतिनिधियों से अनधिकृत संपर्क बनाए रखा और खाते खोलने की प्रक्रिया में गोपनीय सूचनाएं साझा कीं। सीबीआई ने यह भी कहा कि सरकारी धन के प्रवाह, कथित अवैध आर्थिक लाभ, सोने और संपत्तियों की खरीद तथा इस पूरे नेटवर्क में शामिल अन्य लोगों की भूमिका की जांच के लिए पुलिस हिरासत आवश्यक है। एजेंसी के अनुसार परवीन कुमार को दो जुलाई को चंडीगढ़ स्थित सीबीआई कार्यालय में गिरफ्तार किया गया था।