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दवाई की कमी से बढ़ रहा मरीजो का दर्द

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कालका। एसडीएच कालका में एक माह से कई दवाइयाें की कमी होने के कारण मरीज परेशान हैं। अस्पताल के कर्मचारियों के मुताबिक 300 से 400 तरह की दवाएं उपलब्ध हैं, लेकिन कुछ समय से अस्पताल में जरूरी दवाओं की कमी है। इस कारण मरीजों को बाहर से दवाई लेनी पड़ रही है। अस्पताल में सुबह 9 से दोपहर 3 बजे तक डिस्पेंसरी ओपन रहती है। यहां से ही मरीज और उनके तीमारदार दवाइयां लेते हैं। एसडीएच में अंबाला कैंट वेयरहाउस से दवाइयों की सप्लाई की आती है। कई बार दिक्कत होने के चलते टेंडर वाले स्टाकिस्ट को आर्डर देने के साथ-साथ ओपन मार्केट से भी कोटेशन के आधार पर दवाइयों की खरीदारी की जाती है।
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इन दवाइयों की है कमी
अस्पताल में सिफिक्सीन 200 एमजी, एंटीबायोटिक, पेट से संबधित बीमारियोें से संबंधी मेट्रो 400 एमजी करीब 15 से बीस दिन से नहीं है। वहीं सीवर पेन में इस्तेमाल होने वाला ट्रामाडोल इंजेक्शन सहित डायजेपाम इंजेक्शन करीब एक माह से उपलब्ध नहीं है। इस कारण मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ता है।
डिस्पेंसरी में फार्मेसिस्ट की है कमी
अस्पताल की डिस्पेंसरी में तीन फार्मेसिस्ट के पद हैं, लेकिन मौजूदा समय में केवल दो ही फार्मेसिस्ट हैं। इनमें से एक स्टॉक की देखरेख करता है। दूसरा मरीजों को दवाई देता है। ऐसे में अस्पताल की डिस्पेंसरी की दो खिड़कियों से दवाई दी जाती है, लेकिन वर्तमान में एक ही खिड़की से मरीजों को दवाई मिलती है।
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मरीज दिखे परेशान
सोमवार को एसडीएच कालका में छोटी बच्ची को दिखाने आई बीना ने बताया कि बच्ची को बुखार है। डॉक्टर ने कार्ड में जो दवाइयां लिखी थीं, उसमें से एक दवा डिस्पेंसरी से नही मिली है, अन्य बाहर से खरीदनी पड़ेगी। अक्सर दवाई लेने अस्पताल में आती रहती हैं, लेकिन अधिकांश देखा है कि यहां पर दवाइयों की किल्लत रहती है।
कोट
मेडिसन सेंटर सप्लाई से आती है, जैसे ही वह खत्म होती है तो हम डिमांड भेज देते हैं। काफी समय से एंटीबायोटिक नही मिल पा रही है, जिसके चलते हमें लोकल परचेज करनी पड़ती है। पहले लोकल परचेज जल्दी मिल जाती थी लेकिन कुछ समय से दवाइयों के दाम बढ़ने के चलते उन्होंने भी देरी करनी शुरू कर दी है। इमरजेंसी मेडिसन हम लोकल परचेज कर लेते हैं जिनकी शार्टेज होती है उनकी हम डिमांड भेज देते हैं। - डॉ. रूपिन्द्र सिंह सैनी, एसएमओ
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