चंडीगढ़। जानकारी छुपाकर दो सुरक्षा याचिकाएं दाखिल करने के चलते दर्ज हुई एफआईआर में जमानत की मांग पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि न्यायालय की भूमिका कम उम्र की लड़कियों के संरक्षक की है। अक्सर कम उम्र के कारण लड़के बहका कर सहमति संबंध सुरक्षा याचिका दाखिल कर देते हैं जबकि इसके परिणाम लड़की को पता नहीं होते।
मामला गुरदासपुर का है जहां पर सहमति संबंध में सुरक्षा के लिए प्रेमी जोड़े ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी। हाईकोर्ट उनकी दलीलों से सहमत नहीं हुआ और उन्हें याचिका वापस लेने की छूट देते हुए 31 दिसंबर 2020 को उसे खारिज कर दिया था। इसके बाद दोबारा सुरक्षा याचिका दाखिल की गई जिसमें पूर्व में दाखिल की गई याचिका का जिक्र नहीं था। हाईकोर्ट ने इस याचिका पर जोड़े की सुरक्षा की समीक्षा के गुरदासपुर केएसएसपी को आदेश दिए थे। इसके बाद लड़की की मां ने हाईकोर्ट में अर्जी दाखिल कर बताया कि यह जोड़े की यह दूसरी याचिका थी और इसमें उन्होंने पहली याचिका का जिक्र नहीं किया है। इसके साथ ही लड़का पहले से शादीशुदा है और ऐसे में सहमति संबंध का औचित्य नहीं बनता।
एसएसपी को दिया था जांच का आदेश
हाईकोर्ट ने एसएसपी को जांच का आदेश दिया जिसके बाद एफआईआर दर्ज की गई। अब लड़की ने जमानत याचिका दाखिल करते हुए कहा कि उसे जानकारी नहीं थी कि लड़का पहले से शादीशुदा है। साथ ही दूसरी याचिका में पहली याचिका का जिक्र नहीं था इसकी भी उसे जानकारी नहीं थी। हाईकोर्ट ने कहा कि अक्सर इस प्रकार कम उम्र की लड़कियों को बहका कर सहमति संबंध की दलील देते हुए सुरक्षा याचिकाएं दाखिल कर दी जाती हैं। लड़कियों को इस बात की जानकारी नहीं होती कि इसके क्या परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि न्यायालय इस प्रकार की लड़कियों का संरक्षक भी है। इस टिप्पणी के साथ ही हाईकोर्ट ने लड़की की जमानत याचिका मंजूर कर ली है।