चंडीगढ़। पंजाब सरकार ने मोहाली के ईएसआई अस्पताल की दुर्दशा को लेकर दाखिल जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान जवाब दाखिल करते हुए बताया है कि मेडिकल ऑफिसर के रिक्त पद को भर लिया गया है। इसके साथ ही बताया गया कि चतुर्थ श्रेणी के 10 व स्टाफ नर्स का एक पद अभी रिक्त है। मोहाली इंडस्ट्रियल एसोसिएशन की ओर से याचिका दायर करते हुए कहा गया था कि इंप्लाई स्टेट इंश्योरेंस एक्ट 1948 में बना था। इसका उद्देश्य बीमारी, मैटरनिटी व व्यवसाय इंजुरी की स्थिति में लाभ देना था। इसी के तहत ईएसआई का गठन हुआ था। इस स्कीम का लाभ देने के लिए कर्मचारी से 1.75 और नियोक्ता से 4.75 प्रतिशत राशि ली जाती है। कर्मचारियों को मेडिकल सुविधा उपलब्ध करवाने के लिए सरकारी और प्राइवेट अस्पतालों से अनुबंध किया जाता है, जिसके तहत कैशलेस व अन्य लाभ दिए जाऐ हैं।
याची ने कहा कि आरटीआई से प्राप्त जानकारी के अनुसार 2014-15 के दौरान ईएसआई की आमदनी 10768.14 करोड़ रुपये थी और उनका कुल खर्च 751.65 करोड़ था। ऐसे में ईएसआई ने 3356.49 करोड़ का लाभ कमाया। इसके बाद याची ने बताया कि मोहाली में कुल 1 लाख 45 हजार ऐसे कर्मचारी हैं जो ईएसआई से इंश्योर्ड हैं और इनसे ईएसआई 121.80 करोड़ रुपये की आमदनी भी प्राप्त करती है।
बावजूद इसके कुराली, घराओं, सैबा माजरी, बनमाजरा तथा फेज-9 मोहाली में कोई डिसपेंसरी मौजूद नहीं है। याची ने कहा कि लाखों कर्मचारियों के जिले में काम करने के बावजूद कर्मचारियों को मौलिक स्वास्थ्य सुविधाओं से दूर रखा गया है। फेज-7 में मौजूद ईएसआई अस्पताल जो 30 बेड का अस्पताल है वह बहुत बुरी स्थिति में है। अस्पताल में प्राथमिक सुविधाएं देने वाले स्टाफ की भी कमी है और 24 घंटे एंबुलेंस सेवा भी उपलब्ध नहीं है।
याची ने हाईकोर्ट से अपील की कि जिन स्थानों पर डिस्पेंसरी मौजूद नहीं है वहां इसे खोला जाए और अस्पताल में सभी मौलिक सुविधाएं मुहैया करवाने के लिए ईएसआई को निर्देश दिए जाएं।