चंडीगढ़। पंजाब के संगरूर में आरटीओ व अन्य अधिकारियों द्वारा वीआईपी नंबरों को कौड़ियों के भाव में बेचने व बाहरी राज्यों के फर्जी नंबरों का पंजीकरण कर सरकार को करोड़ों रुपये की चपत लगाने के मामले में पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार व सीबीआई से जवाब मांगा है। मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट ने यह स्पष्ट कर दिया कि यदि अगली सुनवाई पर जवाब नहीं आया तो सभी पर 10-10 हजार रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा।
याचिका दाखिल करते हुए रवि जिंदल ने एडवोकेट मंदीप धोत के माध्यम से हाईकोर्ट को बताया था कि पंजाब में वीआईपी नंबरों को कौड़ियों के भाव बांटा जा रहा है। इसके साथ ही नंबरों के पंजीकरण में भी बड़े स्तर पर धांधली है। हाईकोर्ट को बताया गया कि वीआईपी नंबर 200 से 3200 रुपये तक में बांटे गए हैं। इसके साथ ही कई वाहनों के पंजीकरण के लिए तय सरकारी फीस की भी वसूली नहीं की गई। आरटीओ के रिकाॅर्ड में फर्जी रसीदें मौजूद हैं। इस बारे में याचिका सिंगल बेंच के समक्ष पहुंची थी और सिंगल बेंच ने इसे जनहित का मुद्दा बताते हुए याचिकाकर्ता को जनहित याचिका दाखिल करने का सुझाव दिया था।
जनहित याचिका दाखिल करने के बाद हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार व अन्य प्रतिवादियों को नोटिस जारी कर जवाब दाखिल करने का आदेश दिया था। याची ने बताया कि इस आदेश के बाद याची पर इस याचिका को वापस लेने का दबाव बनाया गया। जब याची ने ऐसा नहीं किया तो उसके खिलाफ झूठी एफआईआर दर्ज करवा दी गई। याची ने इसके बाद हाईकोर्ट में अर्जी दाखिल करते हुए इस एफआईआर की निष्पक्ष तरीके से जांच का निर्देश जारी करने की अपील की थी। इन दोनों मामलों में जवाब दाखिल न करने पर हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए अब पंजाब सरकार, सीबीआई व अन्य प्रतिवादियों को हर हाल में अगली सुनवाई पर पक्ष रखने का आदेश दिया है। ऐसा करने में विफल रहने पर हर प्रतिवादी पर 10 हजार रुपये जुर्माना लगाया जाएगा जिसे पीजीआई में गरीब मरीजों के इलाज के लिए जमा करवाना होगा।