चंडीगढ़। माता गुजरी और दो साहिबजादों के अंतिम संस्कार के लिए दौलत लुटाने हुए जमीन को सोने की अशर्फियों से ढककर खरीदने वाले टोडरमल की हवेली को संरक्षित करने के लिए कदम उठाने का पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार को आदेश दिया है। हाईकोर्ट ने हवेली की बदहाली पर सरकार को फटकार लगाते हुए कहा कि 14 साल में इसे संरक्षित करने के लिए कोई कदम नहीं उठाया गया।
याचिका दाखिल करते हुए एडवोकेट एचसी अरोड़ा ने बताया कि 17वीं शताब्दी में गुरु गोबिंद सिंह की मां माता गुजरी और दो बेटे साहिबजादों जोरावर सिंह और फतेह सिंह के अंतिम संस्कार के लिए जमीन खरीदने के लिए टोडरमल ने दौलत लुटा दी थी। जितने स्थान को खरीदा जाना था उसके लिए शर्त रखी गई थी कि उतने स्थान पर सोने के सिक्के खड़े करके रखने होंगे। टोडरमल जो पंजाब के गवर्नर नवाब वजीर खान की कोर्ट में दीवान थे उन्होंने यह शर्त मंजूर की और सोने के सिक्कों से उस स्थान को भर दिया। इसके बाद उन्होंने तीनों के अंतिम संस्कार का इंतजाम किया।
याची ने बताया कि टोडरमल जिन्होंने इतना सब किया आज उनकी ही हवेली जर्जर हालात में है। न तो पंजाब सरकार और न ही एसजीपीसी जो इसकी मालिक है इसके रख रखाव के लिए कोई काम कर रही है। यह भी बताया गया कि एसजीपीसी ने इस हवेली में निर्माण का कार्य भी आरंभ कर दिया। याची ने हाईकोर्ट से अपील की कि इस ऐतिहासिक महत्व की इमारत को संरक्षित किया जाए और इसके जीर्णोद्धार के लिए आवश्यक निर्देश जारी किए जाएं। हाईकोर्ट ने अब पंजाब सरकार को हवेली के संरक्षण के लिए एसजीपीसी के साथ हुए समझौते को पूरा करने का आदेश दिया है। साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि ऐसा करते हुए याचिकाकर्ता के साथ विमर्श करना जरूरी है।