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Panchkula News: नई बिल्डिंग की हालत न हो सिविल अस्पताल जैसी, एसीएस बोले- ध्यान रखें अधिकारी

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पंचकूला। सिविल अस्पताल की बिल्डिंग के हालत खराब है। जगह-जगह लीकेज की वजह से वार्डों में पानी टपक रहा है। डी-ब्लॉक का सेंट्रलाइज्ड एसी ठप पड़ा है। कई शौचालय बंद पड़े हैं। ऐसे हालात मदर एंड चाइल्ड हेल्थ केयर अस्पताल के न होें...इसका ध्यान रखें। यह बात अस्पताल का दौरा करने पहुंचे अतिरिक्त मुख्य सचिव (एसीएस) सुधीर राजपाल ने कही। उन्होंने अस्पताल की फायर एनओसी का काम जल्द पूरा करने का भी निर्देश दिया।
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स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने उन्हें अवगत कराया कि अस्पताल के डी-ब्लॉक के सेंट्रलाइज्ड एसी और मेंटेनेंस के लिए 8 से 9 करोड़ रुपये की मंजूूरी मिल गई है। जल्द ही व्यवस्थाओं में सुधार किया जाएगा। अस्पताल की स्वच्छता पर भी उन्होंने सवाल किए और सफाई व्यवस्था में सुधार के निर्देश दिए। उन्होंने गायनी में बनाए वन स्टॉप क्राइसेस सेंटर (काउंसिलिंग सेंटर) का भी दौरा किया। कर्मचारियों की अस्पताल में ड्यूटी पर भी उन्होंने सवाल-जवाब किए। विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को निर्देश दिया कि जिस कर्मचारी की ड्यूटी जहां है, वहीं उनकी तैनाती की जाए।

34 दिन से हार्ट सेंटर में आयुष्मान कार्डधारकों का उपचार बंद, एसीएस बोले- भुगतान जल्द होगा, उपचार शुरू करवाइए
सिविल अस्पताल के हार्ट सेंटर में आयुष्मान कार्डधारकों का उपचार करीब 35 दिन से बंद है। हार्ट सेंटर का करीब सवा करोड़ रुपये बकाया है, जिसका स्वास्थ्य विभाग अब तक भुगतान नहीं करवा पाया है। स्वास्थ्य विभाग के एसीएस सुधीर राजपाल ने हार्ट सेंटर और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक की। उन्होंने आयुष्मान के जिला नोडल अधिकारी को हार्ट सेंटर के बकाया पैसों के भुगतान के लिए निर्देश दिया। उन्होंने हार्ट सेंटर के इंचार्ज को आश्वासन दिया कि जल्द पैसे का भुगतान करवाया जाएगा। इस बीच मरीजों का उपचार शुरू करने के निर्देश भी दिए। अस्पताल में हार्ट सेंटर पीपीपी मोड पर चलाया जा रहा है। इस अस्पताल में रोजाना की 80 मरीजों की ओपीडी है। इसमें आयुष्मान कार्ड पर रोजाना एक हार्ट स्टंट का ऑपरेशन होता है। इसमें 33 दिन में अस्पताल की ओर से 33 ऑपरेशन टाले गए हैं। इस कारण लोगों को इलाज यहां से शिफ्ट होकर दूसरी जगह करवाना पड़ा है।
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आनन-फानन में पीएम के दौरे के समय ठीक किया, फिर भी लीकेज बरकरार
नवंबर में पीएम नरेंद्र मोदी के दौरे के दौरान आनन-फानन में सिविल अस्पताल की व्यवस्था ठीक की गई थी, इस पर करीब तीन करोड़ रुपये खर्च किया गया था। उसके बाद भी लीकेज में सुधार नहीं हुआ। स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि पीडब्ल्यूडी ने दो साल में तीन करोड़ रुपये खर्च कर दिए हैं, लेकिन हालात में कुछ खास सुधार नहीं है। मरम्मत होने के दो साल बाद भी दीवारों से पानी की लीकेज हो रही है। जनरल वार्ड, पीडियाट्रिक वार्ड, महिला वार्ड सहित अन्य जगह के शौचालय के हालात ठीक नहीं हैं। पीडियाट्रिक की ओपीडी के पास वाला शौचालय भी खराब है। इमरजेंसी के शौचालय में गंदगी का आलम है।
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