पंचकूला। शहर के सेक्टर -6 सिविल अस्पताल में 135 जेनेरिक दवाओं के होने की बात भले ही की जा रही हो, लेकिन इसमें साठ फीसदी दवाएं पूरी तरह से नदारद हैं। डॉक्टर लोगों को अलग से पर्ची पर दवाएं लिख रहे हैं। इसके बाद जेनेरिक दवाएं लिखने के निर्देश भी दवाखाना और डॉक्टरों के नोटिस बोर्ड पर चस्पा हैं। इसके बाद डॉक्टरों की ओर से ब्रांडेड दवाएं लिखी जा रही है। इसमें दवा की खरीद नहीं हो पाने और अंबाला के वेयर हाउस से दवाएं नहीं आने के कारण मरीजों को तीन सौ से दो हजार रुपये तक की दवाएं खरीदनी पड़ रही है। इसका असर मरीजोंं और तीमारदारों की जेब पर सीधे तौर पर पड़ रहा है। इसमें बच्चों की दवाओं के साथ अस्पताल में कानों के सफाई की दवा, मल्टी विटामिन, बच्चों को इंफेक्शन के लिए दी जाने वाली दवाएं और एंटी बायोटिक्स की दवाएं भी नहीं मिल पा रही हैं। डॉक्टर दवा उपलब्ध नहीं होने के बाद बाहर की ब्रांडेड दवाइयां लिख रहे हैं। मरीजों का कहना है कि यह दवा मेडिसिन, ईएनटी, दंत चिकित्सा, स्किन की ओपीडी में लिखी जा रही हैं। रोजाना अस्प्ताल में 3500 की ओपीडी होने के बाद यह हालात बने हुए हैं।
अस्पताल में दवाएं नहीं मिल रहीं
मैं अपने बच्चे को दिखाने के लिए आया हूं। इलाज के लिए सभी एंटीबायोटिक और सभी दवाएं बाहर से लाना पड़ा है। दवाएं जनऔषधि केंद्र में अभी तक नहीं हैं। लगातार ब्रांडेड महंगी कंपनी की दवाएं बाहर से खरीदने का मजबूर हैं। - कलीम, बरवाला
खांसी का सिरप भी नहीं मिला
पहले डॉक्टर की ओर से अस्पताल के दवाखाना में दवा लेने के लिए भेजा गया। वहां पर खत्म हो गया था। इसके बाद बाहर से तीन सौ रुपये खर्च कर दवा लानी पड़ी। जनऔषधि केंद्र में भी दवा नहीं होने की बात कही गई।- अकील, मौलीजागरां
दवा के साथ टेस्टिंग किट बाहर से लाए
मैं इलाज कराने के लिए अस्पताल आया। यहां पर टेस्टिंग किट और दवाएं पांच सौ रुपये की डॉक्टर की ओर से लिखी गई। दवाएं नहीं होने के कारण सभी बाहर से लाना पड़ा। इसके बाद स्किन की डॉक्टर की ओर से इलाज किया गया। - खेमसिंह निवासी अभयपुर
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अस्पताल में जेनेरिक दवाओं के लिखने डॉक्टरों को निर्देश दिए गए हैं। अगर डॉक्टरों की तरफ से इस तरह की नाफरमानी की जाएगी तो इसकी जांच की जाएगी। अस्पताल में दवाएं के स्टॉक को जल्द मंगाया जाएगा -डॉ. आरएस चौहान, पीएमओ, सेक्टर-6 सिविल अस्पताल