सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन पर नगर निगम सख्त, तीन एजेंसियां होंगी तैनात शिकायत पर छह घंटे में कार्रवाई
जनवरी से मई तक 7,026 डॉग बाइट केस, तय समय में शिकायत का समाधान नहीं होने पर लग सकता है 1000 रुपये जुर्माना
संवाद न्यूज एजेंसी
पंचकूला। शहर में बढ़ते डॉग बाइट के मामलों और लोगों की शिकायतों के बाद पंचकूला नगर निगम ने लावारिस कुत्तों को लेकर नई व्यवस्था तैयार की है। सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन के तहत अब स्कूल, कॉलेज, अस्पताल, धार्मिक स्थल, स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स, बच्चों के पार्क और अन्य संवेदनशील सार्वजनिक स्थानों से लावारिस कुत्तों को पकड़ा जाएगा। इसके लिए नगर निगम ने नया टेंडर जारी किया है, जिसके तहत शहर में एक की बजाय तीन एजेंसियां तैनात की जाएंगी। शिकायत मिलने के छह घंटे के भीतर मौके पर पहुंचकर कार्रवाई करनी होगी।
नई व्यवस्था में लावारिस कुत्तों को पकड़ने वाली हर गाड़ी में जीपीएस ट्रैकर लगाया जाएगा, जिससे उसकी लोकेशन और आवाजाही की निगरानी हो सकेगी। नगर निगम ने शिकायतों के निपटारे के लिए छह घंटे की समयसीमा तय की है। तय समय में शिकायत का समाधान नहीं होने पर संबंधित एजेंसी पर प्रति शिकायत 1000 रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।
पांच महीने में 7,026 डॉग बाइट केस
सिविल अस्पताल पंचकूला से मिले आंकड़ों के अनुसार, जनवरी से मई 2026 के बीच जिले में डॉग बाइट के 7,026 मामले सामने आए। इनमें पालतू और लावारिस दोनों तरह के कुत्तों के काटने के मामले शामिल हैं। वर्ष 2025 में पूरे साल 14,230 मामले दर्ज हुए थे। वहीं 2024 में 10,875 और 2023 में 10,161 मामले सामने आए थे।
नसबंदी और वैक्सीनेशन के बाद शेल्टर में होंगे शिफ्ट
नई योजना के तहत संवेदनशील स्थानों से पकड़े गए लावारिस कुत्तों की नसबंदी और वैक्सीनेशन कराया जाएगा। इसके बाद उन्हें निर्धारित डॉग शेल्टर में रखा जाएगा। खतरनाक, पागल, गंभीर रूप से बीमार या बुरी तरह घायल कुत्तों के लिए भी एनिमल बर्थ कंट्रोल रूल्स-2023 के तहत अलग प्रावधान किया गया है।
पुराने टेंडर में नहीं था शेल्टर में रखने का प्रावधान
नगर निगम के मौजूदा ठेके में एजेंसी का काम मुख्य रूप से कुत्तों को पकड़ने और नसबंदी तक सीमित था। संवेदनशील स्थानों से कुत्तों को हटाकर शेल्टर में रखने समेत नए प्रावधान नहीं होने के कारण पहले दो-तीन बार टेंडर सफल नहीं हो सके। अब निगम ने कंपोजिट टेंडर तैयार किया है, जिसमें सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन के अनुसार आवश्यक प्रावधान शामिल किए गए हैं।
तीन जोन में बांटा जाएगा शहर
नगर निगम ने शहर को तीन जोन में बांटकर प्रत्येक जोन के लिए अलग एजेंसी लगाने की योजना बनाई है। एजेंसियों को लावारिस कुत्तों को पकड़कर शेल्टर में शिफ्ट करने के साथ नसबंदी का काम भी करना होगा। निगम का मानना है कि तीन एजेंसियां होने से प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और जवाबदेही भी तय होगी।
कोट
इस बार हमने तीन एजेंसियों को रखने की योजना बनाई है, जो शहर के तीन अलग-अलग इलाकों में काम करेंगी। इससे एजेंसियों में प्रतिस्पर्धा रहेगी, जवाबदेही तय होगी, काम में तेजी आएगी और बेहतर नतीजे मिलेंगे।
-विनय कुमार, निगम आयुक्त