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नशेड़ियों का अड्डा बना निर्माणाधीन स्टेडियम परिसर

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कॉलेज ग्राउंड में पड़ी शराब की बोतलें व ग्लास। - फोटो : PKL OFFICE
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कालका। पुलिस की निष्क्रियता के कारण निर्माणाधीन कालका कॉलेज स्टेडियम नशेड़ियों का अड्डा बन गया है। स्टेडियम परिसर में शराब की बोतलें और गिलास देखी जा सकती हैं। नशेड़ियों का अड्डा बनने के कारण आसपास चोरी की वारदात भी होने लगी है। स्थानीय वासियों का कहना है कि एक तरफ लॉकडाउन में लोग घरों के बाहर नहीं निकल रहे वहीं दूसरी तरफ नशेड़ी दावत कर चोरी की वारदातों को अंजाम दे रहे हैं। पिछले दिनों कालका कॉलेज स्टेडियम का ताला तोड़ा गया था। इससे पूर्व भी कई बार निर्माण सामग्री की चोरी हो चुकी है। इस मामले में स्थानीय प्रशासन और पुलिस को सचेत किया गया था कि निर्माणाधीन स्टेडियम का उपयोग नशेड़ियों द्वारा किया जा रहा है। इसे गंभीरता से नही लिया गया। लोगों का कहना है कि निर्माणाधीन स्टेडियम की देखभाल करनी चाहिए।
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कांग्रेस छात्र इकाई एनएसयूआई आरटीआई सेल के राष्ट्रीय कन्वीनर एवं राष्ट्रीय खिलाड़ी रह चुके दीपांशु बंसल का कहना है कि कालका कॉलेज स्टेडियम का निर्माण तो छात्रों को खेलो में आगे बढ़ाने के नजरिए से किया जा रहा है, परंतु पुलिस और प्रशासन की लापरवाही के चलते इसका उपयोग शराब पीने समेत विभिन्न प्रकार के नशे करने के लिए किया जा रहा है। पुलिस द्वारा इन लोगों पर कोई कार्रवाई नहीं की जाती।
ग्राउंड में टूटी बोतलें और नशीले पदार्थों के रेपर बिखरे पड़े हैं
दीपांशु बंसल का कहना है कि कालेज के छात्रों और युवाओं के कहने पर उन्होंने निर्माणाधीन स्टेडियम परिसर में जाकर देखा तो वहां शराब की बोतलें, टूटी बोतलें, नशीले पदार्थों के सेवन करने पश्चात फेंके कवर, सिरिंज और अन्य नशीली चीजें देखने को मिलीं। कॉलेज गेट का ताला भी टूटा। दीपांशु बंसल का कहना है कि लॉकडाउन के समय ही जिला पुलिस द्वारा 10 हजार से ज्यादा चालान कर करोड़ों का राजस्व इकट्ठा किया गया परंतु नशेड़ियों का कारोबार सरेआम चला।
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कब तक होना चाहिए था खेल स्टेडियम का निर्माण
कॉलेज स्टेडियम 2016 तक बन जाना चाहिए था लोगों के अनुसार राज्य सरकार की अनदेखी के कारण निर्माण कार्य पूरा नही हो पाया। जहां एक तरफ मुख्यमंत्री खेलों को बढ़ावा का दावा करते हैं वहीं जिस स्टेडियम का निर्माण छह माह में होना चाहिए था उसे 60 माह में भी पूरा नही किया गया है।
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