पंचकूला। शहर को कचरे से निजात दिलाने और इसके निस्तारण के लिए शहरी स्थानीय निकाय निदेशालय की ओर से पंचकूला कलस्टर में सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट लगाया जाना है। इसके लिए झूरीवाला में करीब 13.24 एकड़ जमीन पर बनने वाले इस प्लांट पर 61 करोड़ रुपये की लागत आएगी। इसके लिए नगर निगम की ओर से टेंडर भरने के आवेदन मांगे गए हैं और इसकी आखिरी तारीख 17 मई शाम चार बजे तक की है। इसके बाद 20 मई को टेंडर खोले जाएंगे।
जिले में सफाई व्यवस्था को दुरुस्त रखना नगर निगम के लिए यहां सबसे बड़ी चुनौती बना हुआ है। कभी घरों से कूड़ा नहीं उठ पाता है तो कभी डंपिंग ग्राउंड से उठने वाली दुर्गंध विवाद का कारण बन जाती है। शहर से हर रोज निकलने वाला कचरा लगातार एक ही जगह पर डाले जाने के कारण झूरीवाला में कचरे का पहाड़ बन गया है। इसके कारण आस-पास के क्षेत्र में रहने वाले शहरवासियों को भी भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। इस समस्या से निजात पाने के लिए शहरी स्थानीय निकाय निदेशालय ने सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट लगाने का फैसला लिया है। पंचकूला के अलावा कालका का कचरा भी इसी प्लांट में जाएगा। इसके अलावा उम्मीद है कि बरवाला और नारायणगढ़ का कचरा भी निस्तारण के लिए शायद यहीं पर लेकर आया जाए। संवाद
280 टन कचरे का रोज हो सकेगा निस्तारण
यह सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट लगने के बाद हर रोजाना 280 टन कचरे का निस्तारण किया जा सकेगा। प्लांट में कचरे को पूरी तरह खत्म कर दिया जाएगा। इसके लिए एडवांस मशीनें लगाई जाएंगी जो आधुनिक तकनीक से कूड़े का निपटान करेंगी।
कंपनियों को लगानी होगी अपनी तकनीक
प्लांट में पहुंचने वाले कचरे का निस्तारण किस तरह किया जाएगा, यह कंपनियों को ही निर्धारित करना होगा। इसमें कंपनियों को इस बात का भी ध्यान रखना होगा कि उस तरीके से वातावरण प्रदूषित नहीं होना चाहिए। कचरे से खाद बनाई जाएगी या बिजली यह कंपनी की तकनीक पर ही निर्भर करेगा।
28 ट्रैक्टर-ट्रॉलियां जुटेंगी काम में
निदेशालय की ओर से अब तक बनाई गई योजना के मुताबिक शहर से डोर-टू डोर कचरा उठाया जाएगा। इसके लिए 28 ट्रैक्टर-ट्रॉली लगाई जाएंगी। ये कचरे को शहर से उठाकर डंपिंग ग्राउंड तक लेकर जाएंगी। यहां उचित तकनीक द्वारा इसका निस्तारण कर दिया जाएगा।
शहरवासियों को गंदगी से निजात दिलाने के लिए शहरी स्थानीय निकाय निदेशालय ने झूरीवाला में सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट लगाने का फैसला लिया है। यह बनने के बाद कचरे का निस्तारण हो सकेगा। कंपनी को कचरा खत्म करना होगा। वो उससे बिजली बनाती है या उसे किसी और काम में इस्तेमाल करती है, वो उसकी अपनी तकनीक होगी। -आनंद अग्रवाल, एक्सईएन, शहरी स्थानीय निकाय निदेशालय