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एजेएल प्लाट आवंटन मामले में पंचकूला सीबीआई कोर्ट में छह घंटे हुई बहस

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पंचकूला। एजेएल प्लॉट आवंटन मामले में सीबीआई की विशेष अदालत में वीरवार को सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान केस के मुख्य आरोपी हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा कोर्ट में पेश हुए। कोर्ट में आरोप को लेकर 6 घंटे बहस हुई। इसके बाद सीबीआई कोर्ट ने अगली सुनवाई 16 अप्रैल को मुकर्रर की है। पिछली सुनवाई के दौरान सीबीआई ने एजेएल प्लॉट आवंटन मामले के दूसरे मुख्य आरोपी एजेएल हाउस के चेयरमैन रहे मोती लाल वोरा का डेथ सर्टिफिकेट कोर्ट में प्रस्तुत किया था।
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24 अगस्त 1982 को पंचकूला सेक्टर-6 में 3360 वर्गमीटर का प्लॉट नंबर सी-17 तत्कालीन मुख्यमंत्री भजनलाल ने एजेएल प्रकाशन समूह के हिंदी अखबार नवजीवन को आवंटित किया था। कंपनी को छह माह में निर्माण शुरू करके दो साल में काम पूरा करना था, लेकिन वह 10 साल में भी ऐसा नहीं कर पाई। इसके बाद 30 अक्तूबर 1992 को एचएसवीपी ने आवंटन रद्द करके प्लॉट को वापस ले लिया।
14 मार्च 1998 को एजेएल की ओर से आबिद हुसैन ने चेयरमैन हुडा को प्लॉट आवंटन की बहाली के लिए अपील की। 14 मई 2005 को एचएसवीपी के चेयरमैन ने अफसरों को एजेएल कंपनी के प्लॉट आवंटन की बहाली की संभावनाएं तलाशने को कहा, लेकिन कानून विभाग ने आवंटन बहाली के लिए साफ तौर पर इनकार कर दिया। 18 अगस्त 1995 को नए आवंटन के लिए आवेदन मांगे गए। इसमें एजेएल कंपनी को भी आवेदन करने की छूट दी गई।
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28 अगस्त 2005 को एचएसवीपी ने एजेएल को ही 1982 की मूल दर पर प्लॉट आवंटित कर दिया। साथ ही कंपनी को छह माह में निर्माण शुरू करके एक साल में काम पूरा करने को भी कहा। एजेएल अंग्रेजी में नेशनल हेराल्ड, हिंदी में नवजीवन और उर्दू में कौमी आवाज अखबारों का प्रकाशक रहदा है। हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (हुडा) की शिकायत पर राज्य सतर्कता विभाग ने मई 2016 को इस मामले में केस दर्ज किया।
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