चंडीगढ़। उत्कृष्ट सेवा के लिए राष्ट्रपति मेडल पाने वाले चंडीगढ़ पुलिस के सब इंस्पेक्टर संजीव कुमार को पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने बड़ी राहत देते हुए भ्रष्टाचार के मामले में निर्दोष करार देते हुए बरी कर दिया है। सीबीआई अदालत ने उन्हें दोषी मानकर दो साल की सजा सुनाई थी और इसी आदेश के खिलाफ संजीव की अपील मंजूर करते हुए हाईकोर्ट ने याचिका का निपटारा कर दिया। 7 नवंबर, 2008 को दर्ज हुए केस के अनुसार अरविंद कुमार पांडे ने अपना बूथ एक गारमेंट डीलर दीनानाथ मिश्रा को किराए पर दिया हुआ था। पांडे और मिश्रा में अक्तूबर 2008 को बूथ को लेकर झगड़ा हो गया। मिश्रा ने डिस्ट्रिक्ट कोर्ट में सिविल केस फाइल कर दिया। 3 नवंबर, 2008 को मिश्रा का पांडे के साथ समझौता हो गया। इसमें तय हुआ कि कोर्ट का फैसला आने तक बूथ की चाबियां मार्केट प्रधान सुभाष कटारिया के पास रहेंगी। यह समझौता एसआई संजीव कुमार की मौजूदगी में हुआ।
इसी बीच मिश्रा की एप्लीकेशन पर कोर्ट ने मामले में यथास्थिति का फैसला सुना दिया। पांडे ने 5 नवंबर, 2008 को संजीव कुमार और सुभाष कटारिया के खिलाफ सीबीआई को शिकायत दी। शिकायत में कहा गया कि ये दोनों मामले को सेटल करने और उनका बूथ खाली कराने के लिए 50 हजार रुपये रिश्वत की मांग कर रहे हैं। पांडे की शिकायत पर 7 नवंबर, 2008 को सीबीआई ने ट्रैप लगाया। इसके बाद पुलिस ने दोनों को गिरफ्तार किया। सीबीआई ने जो चार्जशीट कोर्ट में दायर की थी उसमें रमेश चंद को भी आरोपी बनाया था, लेकिन उन्हें गिरफ्तार नहीं किया गया था।
केस के बाद विभाग ने 12 नवंबर, 2008 को संजीव कुमार को सस्पेंड कर दिया था, लेकिन 7 मई, 2010 को उन्हें फिर से नियुक्त कर दिया था। इसके बाद 26 अप्रैल, 2018 को सीबीआई अदालत ने उन्हें दोषी करार देते हुए 2 साल की कैद व 25 हजार रुपये जुर्माना की सजा सुनाई थी। दोषी करार देने के बाद संजीव कुमार को बर्खास्त कर दिया गया था। सीबीआई अदालत के आदेश को संजीव कुमार ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। 6 साल के बाद हाईकोर्ट ने अपील पर अपना फैसला सुनाते हुए उन्हें निर्दोष मानते हुए बरी कर दिया है।