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कारगिल के शहीदों को याद कर परिजनों के झलक पड़े आंसू, स्टूडेंट्स भी हुए भावुक

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sector 10 ke DAV college me army divas par sahid javan ke pita D.S. shandu ko sammanit krte huve army adhikari R S mann or any
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स्वतंत्रता संग्राम से लेकर कारगिल युद्ध तक शहर के वीरों का कोई सानी नहीं है। कारगिल युद्ध में चंडीगढ़ के डीएवी कॉलेज से पढ़े कैप्टन विक्रम बत्रा ने शहादत का जाम पीकर दुश्मनों के छक्के छुड़ाए थे। शहर के मेजर संदीप सागर, लेफ्टिनेंट राजीव संधू और स्क्वॉड्रन लीडर सिद्धार्थ वशिष्ठ की शहादत को भी कोई भुला नहीं सकता। कारगिल युद्ध के 20 बरस पूरे होने पर इन वीर सपूतों के परिजनों को शुक्रवार को डीएवी कॉलेज में सम्मानित किया गया। इस दौरान पारिवारिक सदस्यों के साथ कार्यक्रम में मौजूद स्टूडेंट्स भी भावुक हो गए।
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इन जवानों की शहादत से भले ही पारिवारिक सदस्यों की आंखों से आज भी आंसू टपक पड़ते हैं, लेकिन देशभक्ति का जज्बा आज भी कायम है। डीएवी कॉलेज के ऑडिटोरियम में हुए इस कार्यक्रम में कैप्टन विक्रम बत्रा के भाई विशाल बत्रा, मेजर संदीप सागर के पिता हरबंस सागर, लेफ्टिनेंट राजीव संधू के पिता डीएस संधू और स्क्वॉड्रन लीडर सिद्धार्थ वशिष्ठ के माता-पिता जगदीश चंद्र कसल को सम्मानित किया गया। ये सभी चंडीगढ़ के डीएवी कॉलेज और स्कूल से पढ़े हैं। कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि पहुंचे पंजाब, हरियाणा, हिमाचल और चंडीगढ़ एनसीसी के एडिशनल डायरेक्टर जनरल मे. जन. आरएस मान (वीएसएम) ने शहीदों के परिजनों को सम्मानित किया। वहीं, कॉलेज के पूर्व प्रिंसिपल केएस आर्य गेस्ट ऑफ ऑनर रहे। इनके अलावा राष्ट्रपति के सलाहकार एचआर गंधार, पूर्व प्रिंसिपल एस मैर्या, हरियाणा साहित्य अकादमी के डॉयरेक्टर डॉ. पीएम गौर, ब्रिगेडियर रंजीत सिंह, आर्मी विंग के सीओ कर्नल रोहित ठाकुर, एयर विंग के ग्रुप कैप्टन एमआर पांड्या, नेवल सीओ बीएस बिष्ट मौजूद रहे।
हजारों किमी का सफर कर पहुंचे 13 जैक राइफल्स के जवान
कैप्टन विक्रम बत्रा को सलामी देने सेना के जवान करीब 2 हजार किमी का सफर पूरा कर चंडीगढ़ पहुंचे। ये सभी जवान 13 जैक राइफल्स के हैं, कैप्टन विक्रम बत्रा भी इसी बटालियन से थे। इनका स्वागत एनसीसी कैडैट्स ने किया। 13 जैक राइफल्स के यह जवान 23 जून को उत्तराखंड के माना पास से मोटरसाइकिल निकले थे, जो द्रास वॉर मेमोरियल (कारगिल युद्ध स्थल) में शहीदों को श्रद्धांजलि देने के बाद करीब साढे़ सात सौ किमी का सफर कर चंडीगढ़ पहुंचे। जवानों ने मौजूद एनसीसी कैडेट्स से बातचीत की। इस दौरान उन्होंने कारगिल के किस्से सुनाई। 13 जैक राइफल्स के जवान कारगिल पर सेना की ओर से बनाई गई फिल्म भी लेकर आए थे, जिसे उन्होंने कैडेट्स को दिखाई। जानकारों के अनुसार सेना की ओर से बनाई गई यह डॉक्यूमेंट्री फिल्म काफी गोपनीय है। यह विशेष कार्यक्रमों में ही दिखाई जाती है। इसमें कारगिल के युद्ध और उसके बाद पैदा हुई स्थिति की पूरी कहानी है।
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जुड़वां पैदा हुए थे कैप्टन विक्रम बत्रा, नाम था लव-कुश
कैप्टन विक्रम बत्रा का जन्म 9 सितंबर, 1974 को टीचर गिरधारी लाल बत्रा एवं माता कमला के घर हुआ था। कैप्टन बत्रा जुड़वा पैदा हुए थे। दो बेटियों के बाद जुड़वां बच्चों के जन्म पर दोनों के नाम लव-कुश रखे गए थे। लव यानी विक्रम और कुश यानी विशाल। बत्रा के जन्म के समय परिवार हिमाचल प्रदेश के मंडी के जोगिंदर नगर इलाके में रहता था। बाद में स्थाई रूप से परिवार पालमपुर में आकर बस गया। उन्होंने केंद्रीय विद्यालय पालमपुर से 12वीं की परीक्षा पास करने के बाद डीएवी कालेज चंडीगढ़ में बीएससी की। वह एनसीसी के होनहार कैडेट थे। इसी की वजह से उन्होंने सेना में जाने का निर्णय लिया।
कैप्टन बत्रा पर बन रही फिल्म, अगले महीने कारगिल में होगी शूटिंग
कैप्टन विक्रम बत्रा के जीवन पर बालीवुड फिल्म बनाई जा रही है और अगस्त में इसकी शूटिंग कारगिल में होगी। पालमपुर में फिल्म यूनिट ने शूटिंग की है। विक्रम बत्रा जॉय रेस्टोरेंट में दोस्तों के साथ बैठते थे। वहां शूटिंग की जानी थी पर अब रेस्तरां में काफी बदलाव आ गया है। इस कारण शूटिंग नहीं हो सकी। सेक्टर-10 के डीएवी कालेज में भी परीक्षाओं के कारण फिल्म की शूटिंग नहीं हो सकी है।
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