13 वर्षीय नाबालिग के अपहरण और दुष्कर्म के मामले में अदालत ने एक युवक को सात साल की कठोर सजा सुनाई। अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश गुरविंदर कौर की अदालत ने उस पर 20 हजार रुपये का जुर्माना भी किया है।
बता दें कि आरोपी रोहित कुमार पेशे से टैंपो ड्राइवर के तौर पर काम कर रहा था और मूल रूप से हाथरस, उत्तर प्रदेश का रहने वाला है।
25 अप्रैल, 2012 को आरोपी रोहित कुमार ने पिंजौर के एक गांव में रहने वाली 13 वर्षीय लड़की को बहला फुसलाकर भगाकर ले गया। इसके बाद दोनों कानपुर में रुके थे। करीब नौ महीने बाद लड़की के वापस लौटने पर उसने परिजनों को जानकारी दी। लड़की के परिजनों ने 28 अप्रैल, 2012 को पुलिस में रोहित के खिलाफ मामला दर्ज कराया था।
पुलिस ने मामला दर्ज कर रोहित को गिरफ्तार कर लिया था और मेडिकल जांच में लड़की के साथ रेप की पुष्टि हुई थी। हालांकि, पेशी के दौरान लड़की अपने बयान से मुकर गई थी, लेकिन नाबालिग होने की वजह से अदालत ने मेडिकल रिपोर्ट को आधार मानते हुए यह सजा सुनाई है। आरोपी रोहित कुमार के खिलाफ लड़की के अपहरण और प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रन अंडर सेक्सुअल ऑफेंस एक्ट के तहत सात साल की कठोर सजा सुनाई है।