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Panchkula News: गुरुग्राम ब्लास्ट केस में विनय को एनआईए कोर्ट से झटका, अंतरिम जमानत खारिज

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बीमार मां के इलाज के लिए चार सप्ताह की मांगी थी राहत
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एनआईए ने फरार होने की आशंका जताई, कोर्ट ने कहा- पहले ही एक दिन मिलने की अनुमति मिल चुकी
संवाद न्यूज एजेंसी
पंचकूला। गुरुग्राम में हुए आतंकी विस्फोटों के मामले में आरोपी विनय को पंचकूला स्थित एनआईए की विशेष अदालत से राहत नहीं मिली। अदालत ने गंभीर रूप से बीमार मां के इलाज और उनके उपचार के लिए 15 लाख रुपये की व्यवस्था करने का हवाला देकर मांगी गई चार सप्ताह की अंतरिम जमानत याचिका खारिज कर दी। एनआईए के अनुसार विनय के खिलाफ यूएपीए, विस्फोटक पदार्थ अधिनियम और बीएनएस की विभिन्न गंभीर धाराओं के तहत मामला दर्ज है। जांच एजेंसी का आरोप है कि विनय प्रतिबंधित आतंकी संगठन बब्बर खालसा इंटरनेशनल और घोषित आतंकी सतविंदर सिंह उर्फ गोल्डी बराड़ के नेटवर्क से जुड़ा है।

एनआईए का आरोप है कि विनय ने विस्फोटक सामग्री पहुंचाने, आतंकी फंडिंग की व्यवस्था करने और मामले से जुड़े अन्य आरोपियों के संपर्क में रहने में भूमिका निभाई। सुनवाई के दौरान एजेंसी ने अंतरिम जमानत का विरोध करते हुए आरोपी के फरार होने की आशंका भी जताई।
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एनआईए ने कहा- मां की देखभाल के लिए परिवार के सदस्य मौजूद

एनआईए की ओर से अधिवक्ता राजन मल्होत्रा ने अदालत को बताया कि आरोपी की मां का इलाज एम्स झज्जर में चल रहा है। उनकी देखभाल के लिए परिवार के अन्य वयस्क सदस्य भी मौजूद हैं। एजेंसी ने कहा कि मामले के कई आरोपी विदेश में फरार हैं। ऐसे में विनय को अंतरिम जमानत मिलने पर उसके भी देश से बाहर भागने की आशंका है।

चंडीगढ़ कोर्ट पहले ही एक दिन मिलने की दे चुकी अनुमति

सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि चंडीगढ़ की अदालत ने 26 अगस्त 2026 को आरोपी को पुलिस हिरासत में एक दिन अपनी मां से मिलने की अनुमति दी थी। इसके बाद विनय ने पंचकूला की एनआईए अदालत से अतिरिक्त समय की मांग की।

अदालत ने कहा कि जब सक्षम अदालत मामले के तथ्यों पर विचार करने के बाद एक दिन की मुलाकात की अनुमति दे चुकी है तो अलग अदालत में जाकर उस अवधि को बढ़ाने की मांग नहीं की जा सकती। अतिरिक्त समय की आवश्यकता होने पर आरोपी को उसी अदालत का रुख करना होगा।

सह-आरोपियों की जमानत का तर्क भी नहीं चला

आरोपी के वकील ने दलील दी कि मामले में कुछ अन्य आरोपियों को जमानत मिल चुकी है, इसलिए विनय को भी अंतरिम राहत दी जानी चाहिए। अदालत ने इस तर्क को स्वीकार नहीं किया। कोर्ट ने कहा कि सह-आरोपियों को अलग तकनीकी आधारों पर जमानत मिली थी, जबकि विनय ने मां के इलाज के मानवीय आधार पर अंतरिम राहत मांगी है।
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अदालत ने यह भी ध्यान में रखा कि आरोपी के खिलाफ हिसार और चंडीगढ़ में अन्य आपराधिक मामले लंबित हैं। इन परिस्थितियों को देखते हुए एनआईए की विशेष अदालत ने विनय की चार सप्ताह की अंतरिम जमानत याचिका खारिज कर दी।
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