फरीदाबाद स्थित बीएसएनएल कार्यालय में तैनात रहते 45 हजार रुपये रिश्वत लेते पकड़े गए आरोपी आदेश कुमार गुप्ता को पंचकूला की विशेष सीबीआई अदालत से राहत नहीं मिली।
अदालत ने अभियोजन मंजूरी से संबंधित आंतरिक नोटशीट, अग्रेषण पत्र, विभागीय पत्राचार और अन्य दस्तावेज उपलब्ध कराने की उसकी अर्जी खारिज कर दी। हालांकि, अदालत ने आरोपी को उचित चरण पर किसी विशेष दस्तावेज की मांग करने की छूट दी है।
सीबीआई के अनुसार, आरोपी को जाल बिछाकर 45 हजार रुपये रिश्वत लेते पकड़ा गया था। जांच पूरी करने के बाद 18 जून 2018 को आरोप पत्र दाखिल किया गया। अभियोजन मंजूरी का आदेश 8 अगस्त 2018 को जारी हुआ था और इसकी प्रति आरोपी को उपलब्ध कराई जा चुकी है।
आरोपी ने अदालत में अर्जी देकर मंजूरी दिए जाने से पहले जांच अधिकारी की ओर से सक्षम प्राधिकारी को भेजे गए अग्रेषण पत्र, नोटशीट, संलग्न दस्तावेज और विभागीय पत्राचार उपलब्ध कराने की मांग की थी। उसका तर्क था कि इन दस्तावेजों से पता चलेगा कि अभियोजन मंजूरी देते समय सक्षम प्राधिकारी ने मामले के सभी तथ्यों पर उचित तरीके से विचार किया था या नहीं।
सीबीआई ने बताया आंतरिक प्रशासनिक रिकॉर्ड
सीबीआई ने अर्जी का विरोध करते हुए कहा कि मांगे गए दस्तावेज आंतरिक प्रशासनिक रिकॉर्ड हैं और अभियोजन द्वारा भरोसा किए गए दस्तावेजों का हिस्सा नहीं हैं। सीबीआई ने यह भी कहा कि आरोपी को सभी संबंधित दस्तावेज और अभियोजन मंजूरी का आदेश पहले ही उपलब्ध कराया जा चुका है।
आठ साल बाद भी आरोप तय नहीं
अदालत ने कहा कि मामले में आरोप पत्र दाखिल हुए आठ साल से अधिक समय हो चुका है, लेकिन मामला अभी तक आरोप तय करने के चरण तक नहीं पहुंचा है। अदालत ने माना कि आरोपी की ओर से दायर विभिन्न अर्जियों के कारण कार्यवाही में देरी हुई है।
अदालत ने स्पष्ट किया कि मामले में अभियोजन मंजूरी मौजूद है और उसकी प्रति आरोपी को मिल चुकी है। यदि मंजूरी की वैधता को लेकर कोई आपत्ति है तो उसे मामले की सुनवाई के दौरान साक्ष्यों के आधार पर उठाया जा सकता है। इन्हीं परिस्थितियों को देखते हुए अदालत ने पूरी मंजूरी फाइल और आंतरिक पत्राचार उपलब्ध कराने की अर्जी खारिज कर दी। हालांकि, उचित चरण पर किसी विशेष दस्तावेज की आवश्यकता होने पर आरोपी को उसे मांगने की छूट दी गई है।