चंडीगढ़। सशस्त्र बल न्यायाधिकरण (एएफटी) ने एक महत्वपूर्ण निर्णय दिया है। न्यायाधिकरण ने कहा कि पहली पत्नी की मृत्यु के बाद दूसरी पत्नी को पारिवारिक पेंशन का हक है। यह हक तब भी है जब दूसरी शादी कानूनी रूप से वैध न मानी जाए।
यह फैसला जालंधर निवासी सतनाम कौर के मूल आवेदन पर आया है। न्यायाधिकरण ने 15 सितंबर 2018 के उस पत्र को रद्द किया जिसने उन्हें पेंशन देने से इन्कार किया था। पीठ ने केंद्र सरकार को 10 फरवरी 2017 से सामान्य पारिवारिक पेंशन देने का आदेश दिया। इन लाभों पर छह फीसदी वार्षिक ब्याज भी देना होगा।
जगत सिंह ने 1 जनवरी 1940 को मोहिंदर कौर से पहली शादी की थी। उन्होंने 13 अप्रैल 1970 को मोहिंदर कौर की सहमति से सतनाम कौर से दूसरी शादी की। सतनाम कौर और जगत सिंह की एक बेटी सुखविंदर कौर भी थी। सेना के सेवा रिकॉर्ड में दोनों पत्नियों और बेटी का नाम दर्ज था।
मामले के तथ्य :
जगत सिंह 9 जुलाई 1961 को सेवानिवृत्त हुए थे। उनकी मृत्यु 13 फरवरी 1998 को हुई। इसके बाद मोहिंदर कौर को 14 फरवरी 1998 से पारिवारिक पेंशन मिलने लगी। मोहिंदर कौर की 9 फरवरी 2017 को मृत्यु के बाद पेंशन बंद कर दी गई। सतनाम कौर ने संबंधित अधिकारियों के समक्ष पेंशन जारी करने की मांग की, जिसे खारिज कर दिया गया था।
न्यायाधिकरण का निर्णय :
केंद्र सरकार ने पहली पत्नी के जीवित रहते दूसरी शादी को अवैध बताया था। न्यायाधिकरण ने कहा कि बहुविवाह की स्थिति में दूसरी शादी भले ही शून्य मानी जाए लेकिन लंबे सहवास और मामले की परिस्थितियों को देखते हुए पहली पत्नी की मृत्यु के बाद दूसरी पत्नी को भरण-पोषण और पेंशन संबंधी लाभों से पूरी तरह वंचित नहीं किया जा सकता।